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साक्षात भगवान शिव का स्वरुप होता है बेलपत्र का वृक्ष, पत्ती तोड़ते समय इस चीज़ का रखें विशेष ध्यान

साक्षात भगवान शिव का स्वरुप होता है बेलपत्र का वृक्ष, पत्ती तोड़ते समय इस चीज़ का रखें विशेष ध्यान

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Tanvi Sharma

Jun 08, 2018

belpatra

साक्षात भगवान शिव का स्वरुप होता है बेलपत्र का वृक्ष, पत्ती तोड़ते समय इस चीज़ का रखें विशेष ध्यान

शिवपूजा में बिल्वपत्र बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है। यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। पुराणों के अनुसार शिव पूजा बिल्वपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है, भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करने के लिए बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से या कुंकुम से 'ॐ नम: शिवाय' लिखकर अर्पित करना चाहिए। शिवपूजन में संख्या का बहुत महत्व होता है। अत: विशेष अवसरों पर जैसे शिवरात्रि, श्रावण के सोमवार, प्रदोष आदि को 11, 21, 31, 108 या 1008 बिल्वपत्र शिवलिंग पर अर्पित किए जा सकते हैं।

इस मंत्र के साथ करें बिल्वपत्र अर्पित

'ॐ नम:शिवाय' इस मंत्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर बिल्वपत्र समर्पित किए जा सकते हैं। मंत्र बोलने में असमर्थ होतों केवल 'शिव' 'शिव' कहकर भी बेलपत्र अर्पित कर सकते हैं।

बेलपत्र तोड़ते समय इन चीजों का रखें ध्यान

1. चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथ‍ियों को, सं‍क्रांति के समय और सोमवार को बेलपत्र न तोड़ें। क्योंकि बेलपत्र भगवान शंकर को बहुत प्रिय है, इसलिए इन तिथ‍ियों या वार से पहले तोड़ा गया पत्र चढ़ाना चाहिए।

2. बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए। क्योंकि बेलपत्र को भगवान शिव का रुप माना जाता है।

3.तीन पत्ते वाले, कोमल, अखण्ड बिल्वपत्रों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।

4. नए बेलपत्र न मिलें तो चढ़ाए हुए बेलपत्र को ही धोकर बार-बार चढ़ाया जा सकता है।

श‍िवलिंग पर प्रकार चढ़ाएं बेलपत्र

1. महादेव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए।

2. बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए।

3. बेलपत्र 3 से लेकर 11 दलों तक के होते हैं. ये जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही उत्तम माने जाते हैं।

4. अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए. उससे भी पाप-ताप नष्ट हो जाते हैं।

5. श‍िवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए।