19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपकी बात, क्या आरक्षण की पचास प्रतिशत की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

2 min read
Google source verification

प्रतीकात्मक तस्वीर

.....
विकास में बाधक है आरक्षण
आरक्षण की सीमा को पचास प्रतिशत से कदापि नहीं बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि आरक्षण समानता के अधिकार के विपरीत है तथा प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है। आरक्षण देश के विकास में बाधक है। यदि आरक्षण की व्यवस्था आजादी के 7७ वर्ष बाद भी वंचितों को मुख्यधारा में शामिल नहीं कर पाई है, तो इसे जारी क्यों रखा जाना चाहिए? -डॉ. एस.जिंदल, उदयपुर ............
जरूरी है समीक्षा
संविधान में आरक्षण की समय-सीमा 10 वर्ष रखी गई थी। उस वक्त कहा गया था कि संविधान लागू होने के दस वर्ष तक आरक्षण के प्रावधानों में कोई बाधा नहीं होगी लेकिन ये प्रावधान अनिश्चित काल के लिए लागू नहीं होना चाहिए। लेकिन, इसे लगातार बढ़ाना प्रतिभा तथा आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं के साथ नाइंसाफी है। समय की मांग है कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जाए।
-हुकुम सिंह पंवार, टोड़ी, इन्दौर
.....................
कहां हैं समानता
आरक्षण व्यवस्था युवाओं में असमानता पैदा कर रही है। आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने से सामान्य वर्ग के लोगों का भविष्य खतरे में आ सकता हैं। राजनेता आरक्षण की लुभावनी घोषणाओं से अपना वोट बैंक तैयार कर रहें हैं। केंद्र और राज्य सरकारों को जातीय आरक्षण को कम करने के प्रयास करने चाहिए। जो वर्ग पिछड़े हैं, उन्हें आर्थिक रूप से सहयोग करना चाहिए। इससे सभी वर्गों में समानता का भाव उत्पन्न होगा।
-मनु प्रताप सिंह, चींचडौली, खेतड़ी
.......
आरक्षण को कम किया जाए
संविधान निर्माताओं ने निचले तबके को ऊंचा उठाने के लिए आरक्षण व्यवस्था का निर्माण किया। लेकिन, राजनीतिक दल अपने हित के लिए आरक्षण व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके कारण यह सीमा पचास प्रतिशत तक पहुंच गई है, लेकिन अब इसकी सीमा बढ़ाना न्यायोचित नहीं है। आजाद भारत के 77 वर्ष बीत चुके है। अब तक कई कमजोर जातियां समाज में अपना उचित स्थान बना चुकी है। अब आरक्षण प्रतिशत कम करना ही न्यायसंगत होगा।
- सुगम गुप्ता, लालसोट

  .....
 जाति के आधार पर न हो आरक्षण  आज के आधुनिक दौर में जाति के आधार पर आरक्षण होना ही नहीं चाहिए और जो दिया जा रहा है उसकी समीक्षा होनी चाहिए।  आरक्षण के नाम पर अमीर लोग गरीबों का हक खा रहे हैं। इसलिए आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की बजाय उसे आर्थिक आधार पर कर देना चाहिए जिससे वास्तविक गरीब को उसका लाभ मिल सके।
   -ईश्वर सिंह राजपूत, देवास, मप्र
 ..........  
आरक्षण सीमा बढ़ाना ठीक नहीं
अब समय आरक्षण की सीमा बढ़ाने का नहीं, बल्कि आरक्षण के प्रावधान को वंचितों के उत्थान के लिए उपयोगी बनाने का  है। उच्चतम न्यायालय का निर्णय उचित है।  
-बाल कृष्ण जाजू, जयपुर
 ................  
अन्याय नहीं हो  
आरक्षण की पचास प्रतिशत सीमा को नहीं बढ़ाया जाना चाहिए क्योंकि आरक्षण प्रतिशत को बढ़ाना अनारक्षित वर्ग के साथ अन्याय होगा। -ओमप्रकाश श्रीवास्तव,, उदयपुरा, मप्र