
श्रीगंगानगर. इलाके में गर्मी ने लोगों की नींद उड़ा दी हैं। इसी सबसे बड़ी वजह जिला मुख्यालय की पेराफेरी में दो दशक में कृषि भूमि से हरियाली साफ कर वहां प्राइवेट कॉलोनी बनाने की होड़ इतनी अधिक हो गई है कि यह वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण बढ़ गया है। वनस्पति के सफाए से तापमान पर सीधा असर रहने लगा हैं। इससे अधिकतम तापमान में करीब चार प्रतिशत की बढ़ोत्तरी नजर आई है। यही हाल और रहा तो अधिकतम तापमान पचास डिग्री पार हो जाएगा। नगर विकास न्यास के पेराफेरी एरिया की लगभग 1622 बीघा कृषि भूमि यानी करीब साढ़े 64 मुरब्बा भूमि पर 402 प्राइवेट कॉलोनियां बन चुकी हैं। न्यास के आंकड़ों के अनुसार चार साल में 552 बीघा पर 138 नई कॉलोनियां बनी है। सूरतगढ़ रोड पर गांव महियांवाली तक और हनुमानगढ़ रोड पर रीको से आगे नई कॉलोनियां बन रही हैं। श्रीकरणपुर रोड पर गांव 10 जैड तक, केसरीसिंहपुर रोड पर गांव मिर्जेवाला तक, पदमपुर रोड पर गांव सात ए तक, हिन्दुमलकोट रोड पर गांव कालियां, अबोहर रोड पर गांव साधुवाली तक, सादुलशहर रोड पर गांव बनवाली तक प्राइवेट कॉलोनियों का जाल बिछ चुका है।
ऐसे ग्रामीण इलाके, जो नगर परिषद, नगर पालिका, यूआईटी या विकास प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में आ जाते हैं। उन एरिया में जमीनों के भू-उपयोग परिवर्तन, कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन का जिम्मा इन्हीं निकायों के पास आ जाता है। हालांकि ऐसे एरिया में पंचायत समितियां व ग्राम पंचायतें भी होती हैं। जिला मुख्यालय पर करीब 56 चक ऐसे हैं जो पेराफेरी एरिया के दायरे में है।
पर्यावरण प्रेमी पूर्ण बिश्नोई का कहना है कि पेराफेरी में प्राइवेट कॉलोनियों की होड़ से वनस्पतियां साफ कर दी गईं। हरे पेड़ों को काट दिया गया, लेकिन जिला प्रशासन, यूआईटी प्रशासन और वन विभाग ने चुप्पी साधे रखी। अगले कुछ सालों में हरियाली साफ करने का खमियाजा भी भुगतना पड़ेगा। प्रकृति बड़े परिवर्तन की ओर अग्रसर है। करीब एक दशक से प्रकृति का रवैया ज्यादा कठोर हुआ है। बीते ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्मी और शरदकाल में लम्बे समय तक अत्यधिक ठंड का रहना व वर्षा में अनियमितता अब दिखने लगी है। इस कारण पृथ्वी पर रहने वाले प्रत्येक प्राणी की जीवनशैली पर प्रभाव पड़ा है। प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ के परिणाम भयावह हो होंगे।
आज जिधर देखो गर्मी एवं मौसम की चर्चा है। जिसको देखो वह गर्मी से परेशान है और गर्मी से राहत पाने की जुगत में है। कभी सोचा है इस तरह के हालात क्यों बने? कौन है इस बढ़ते तापमान के लिए जिम्मेदार? गहराई से सोचेंगे तो पाएंगे कि सब अपना ही तो किया धरा है। शहर विस्तार के चक्कर में धड़ाधड़कॉलोनीजबसती गई लेकिन हरियाला साफ होती गई। पेड़ कटे उस अनुपात में लगे नहीं। नजीता यह हुआ कि हरियाली की कीमत पर कंक्रीट के जंगल तैयार हो गए। हालात यह है कि इलाके की 1622 बीघा कृषि भूमि में चार सौ निजी कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।
Published on:
01 Jun 2024 04:09 pm
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