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हर भारतीय को जानना चाहिए हिन्दू नववर्ष की यह खास बातें, हर राज्य की है अलग मान्यताएं

हर भारतीय को जानना चाहिए हिन्दू नववर्ष की यह खास बातें, हर राज्य की है अलग मान्यताएं

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भोपाल

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Tanvi Sharma

Apr 01, 2019

gudi padwa 2019

चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल 2019 से प्रारंभ होगी और इसी दिन भारतीय नववर्ष की भी शुरुआत होने जा रही है। इस दिन से विक्रम संवत 2076 शुरु होगा। हिंदू नववर्ष के साथ ही इस दिन हिंदू कैलेंडर भी शुरु हुआ था। भारतीय नव वर्ष चैत्र से शुरु होता है और फाल्गुन माह पर समाप्त होता है। भारतीय नववर्ष में भी 12 माह होते हैं चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। चैत्र प्रतिपदा के दिन अलग-अलग स्थानों पर अनेक मान्यताएं हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा कहीं वर्ष प्रतिपदा तो कहीं उगादी पर्व के रुप में इसे बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं अलग-अलग स्थानों पर चैत्र प्रतिपदा या हिंदू नववर्ष की मान्यताएं.....

इस दिन हुआ था सृष्टी का निर्माण

कहा जाता है की गुड़ी पड़वा वाले दिन ही ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था इस‍लिए इसे नवसंवत्‍सर कहा जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन, महीने और वर्ष की गणना करते हुए पंचांग की भी रचना की थी। इसलिए इसका महत्व बहुत माना जाता है।

इसके अलावा शालिवाहन शक का प्रारंभ भी इसी दिन से होता है। शालिवाहन शक को पीछे एक कहानी प्रचलित हैं, जिसके अनुसार शालिवाहन नामक एक कुम्‍हार के लड़के ने अपने विरोधियों से लड़ने के लिए मिट्टी के सैनिकों की सेना बनाई थी और उसपर मंत्रोच्चारण द्वारा जल छिड़क कर उनमें प्राण डाल दिए। इसके बाद उस मिट्टी की सेना ने शक्तिशाली दुश्मनों को पछाड़ दिया था और विजय पा ली थी। इसी विजय के प्रतीक के रूप में 'शालिवाहन शक' की शुरुआत मानी गई है।

गुड़ी पड़वा का महत्व

'गुड़ी' का अर्थ विजय पताका से है। इसी दिन रामायण काल में भगवान श्री राम ने वानरराज बाली के अत्‍याचारी शासन से दक्षिण की प्रजा को मुक्ति दिलाई थी। इसके बाद वहां की प्रजा ने अपने घरों में एक विजय पताका फहराया जिसे ही गुड़ी कहा जाता है। उसके बाद से ही इस दिन गुड़ी पड़वा के नाम से मनाया जाता है।

गुड़ी पड़वा के पर्व पर आंध्रप्रदेश में एक विशेष प्रकार का प्रसाद बांटा जाता है। वहां के लोगों का मानना है की निराहार रहकर जो भी व्यक्ति इस प्रसाद को ग्रहण करता है वह निरोगी रहता है और चर्मरोग से भी मुक्ति मिलती है।

विभिन्न स्थानों में गुड़ी पड़वा

5. कश्मीरी हिन्दू इस दिन को नवरेह के तौर पर मनाते हैं।