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वो अपना घर छोड़ आए, यहां जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं मिला

बाड़मेर। आजादी के बाद से सीमावर्ती जिलों में सवा लाख के करीब पाक विस्थापित आकर बसे हैं। वहीं, थार एक्सप्रेस की वर्ष 2006 में शुरुआत होने के बाद यह सिलसिला फिर शुरू हुआ और अब तक जारी था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद रिश्तों में आई खटास के चलते दोनों देशों के मार्ग बंद हो गए हैं। इसके बाद शरणार्थी चिंतित हैं। साथ ही यहां भारत में मूलभूत सुविधाओं और नागरिकता की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार ने पाक विस्थापित परिवारों को स्वयं का पक्का आवास निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन उन परिवारों का दर्द यह है कि बिना भूखंड आवास कहां बनेगा।

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पाक विस्थापितों का दर्द
नागरिकता, जमीन और रोज़गार के लिए अब भी संघर्ष जारी, सरकार की घोषणाएं अधूरी
विश्व शरणार्थी दिवस

बाड़मेर। आजादी के बाद से सीमावर्ती जिलों में सवा लाख के करीब पाक विस्थापित आकर बसे हैं। वहीं, थार एक्सप्रेस की वर्ष 2006 में शुरुआत होने के बाद यह सिलसिला फिर शुरू हुआ और अब तक जारी था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद रिश्तों में आई खटास के चलते दोनों देशों के मार्ग बंद हो गए हैं। इसके बाद शरणार्थी चिंतित हैं। साथ ही यहां भारत में मूलभूत सुविधाओं और नागरिकता की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार ने पाक विस्थापित परिवारों को स्वयं का पक्का आवास निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन उन परिवारों का दर्द यह है कि बिना भूखंड आवास कहां बनेगा।

बाड़मेर जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में शरणार्थी रहते हैं। वर्ष 2007 के बाद यहां आए 75 शरणार्थियों को नागरिकता मिल चुकी है, जबकि जिला कलेक्ट्रेट में 31 आवेदन लंबित हैं। इसके अलावा वीजा पर 356 लोग बाड़मेर आकर बस चुके हैं। उन्हें निर्धारित अवधि पूर्ण होने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा।
आने का सिलसिला जारी

पाकिस्तान से 1947, 1965 और 1971 में बड़ी संख्या में शरणार्थी आए। यह सिलसिला जारी था, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह आवागमन बंद हो गया है। इससे पहले, थार एक्सप्रेस के प्रत्येक फेरे में एक-दो परिवार यहां पहुंचकर जोधपुर और बाड़मेर में बस रहे थे। शरणार्थी यहां आने के बाद रोटी-बेटी के रिश्ते से जुड़े और उनके परिवारों के संबंध यहां पहले से बसे लोगों से भी हो रहे हैं। ऐसे में रोटी-बेटी के इस रिश्ते ने शरणार्थियों को नई पहचान दी है।
ये हैं शरणार्थियों की प्रमुख समस्याएं:

नागरिकता में विलंब: सात साल बाद भारत की नागरिकता मिलती है। शरणार्थियों की मांग है कि यह अवधि घटाकर पांच वर्ष की जाए।
शैक्षणिक/नौकरी में मान्यता: पाकिस्तान से प्राप्त डिग्रियों को मान्यता मिले और उसके आधार पर सरकारी नौकरी या अन्य कार्य में तवज्जो दी जाए।

रोजगार की विवशता: डिग्री होने के बावजूद दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ रही है।
भूमि आवंटन की समस्या: शरणार्थियों को आवंटित जमीनों के मामलों का शीघ्र निपटारा हो ताकि वे स्थायी आवास बना सकें।

आवास योजना में व्यावहारिक दिक्कत: बिना भूखंड आवंटन के आवास योजना निष्प्रभावी है।
सरकारी योजना व आरक्षण: नौकरी में आरक्षण व रोजगार के लिए योजनाएं लागू हों।

वर्जन
जमीन के साथ रोजगार मिले

सरकार शरणार्थियों को भूखंड का आवंटन करे ताकि वे मकान बनाकर रह सकें। इसके अलावा शिक्षा में सहूलियत और नौकरी में आरक्षण मिले। पाकिस्तान में हम हजारों बीघा जमीन छोड़कर आए हैं। नागरिकता के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। मुझे 20 साल में नागरिकता मिली है। – सतीदानसिंह, पाकशरणार्थी
सरकार राहत दे

सरकार ने शरणार्थियों के लिए आवास योजना शुरू की है, लेकिन बिना भूखंड के हम आवास कैसे बनाएंगे। शरणार्थियों के पास जमीन ही नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तानी होने के कारण बार-बार परेशान नहीं किया जाए। जो आदमी देश छोड़कर आया है, उसे यहां राहत मिलनी चाहिए। -नरपतसिंह धारा, पाक विस्थापित