
सड़क, पेयजल, सिंचाई आदि परियोजनाओं के लिए भू-अर्जन की धीमी रफ्तार विकास कार्यों की गति को रोक रही है। जिले में दो प्रकार से भू-अर्जन की कार्रवाई चल रही है। ए-82 आपसी सहमति से क्रय नीति और भू-अर्जन अधिनियम-2013 के तहत अलग-अलग प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन किया जा रहा है। भू-अर्जन के कई प्रकरणों में मूल प्रस्ताव प्राप्त न होने, जमीन की गणना में लापरवाही, किसानों का विरोध आदि होने की बात सामने आई है। आपसी सहमति से क्रय नीति के 26 तो भू-अर्जन अधिनियम-2013 के तहत 79 प्रकरण लंबित हैं। जिले में कुल 105 प्रकरण भू-अर्जन के लंबित हैं।
दिल्ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर के तहत चार ग्रामों की जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। यहां पर स्थानीय किसानों ने बीते दिनों विरोध किया था, जिसके बाद से यह प्रस्ताव अटक गया है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा जिला प्रशासन की ओर प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। औद्योगिक कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, जो अधर में लटक गया है।
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में विकास कार्यों के लिए होने वाले भू-अर्जन को लेकर चार गुना ज्यादा मुआवजा देने का निर्णय लिया है। ऐसे में जिले के उन लोगों, जो भू-अर्जन के कारण प्रभावित हो रहे हैं, उन्हें नए नियम के अनुसार मुआवजा मिलेगा या नहीं, फिलहाल यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है।
जेरा मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बेरखेरी गुसाई ग्राम के भू-अर्जन में विभाग की ओर से करीब 90 प्रतिशत तक की मुआवजा राशि जमा नहीं की गई है। सर्विस चार्ज के रूप में करीब दो करोड़ की अतिरिक्त राशि जमा है, जिसे वित्त विभाग को वापस किया जा रहा है।
पड़रिया कलां गांव में जल संसाधन विभाग को जल परियोजना तैयार करनी है। विभाग की ओर से प्रशासन को पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से जमीन की गणना संबंधी प्रस्ताव भेज दिया गया। प्रभावित लोग इसका विरोध कर सकते हैं, जिसके कारण प्रशासन ने उक्त प्रस्ताव को दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग को ग्राम मोकलपुर में विकास कार्य के लिए भू-अर्जन करना है, लेकिन गणना पत्रक त्रुटिपूर्ण भेज दिया गया, जिसके कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
आपचंद्र गुफाओं के पास सिंचाई परियोजना का विस्तार होना है, लेकिन भू-अर्जन के लिए प्रारंभिक जांच का प्रस्ताव ही प्रशासन को नहीं भेजा गया है।
बिलहरा जल परियोजना के लिए एसडीएम जैसीनगर की ओर से भेजा गए प्रस्ताव को त्रुटिपूर्ण पाया गया है। इस वजह से उक्त प्रस्ताव को दोबारा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
माधो परियोजना के लिए भू-अर्जन की गणना में गंभीर त्रुटि की गई। किसानों की जमीन को सिचिंत-असिचिंत
शासन की ओर से अभी आदेश नहीं मिला है। भोपाल मुख्यालय से जो आदेश प्राप्त होगा, उसी के तहत आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। - अविनाश रावत, अपर कलेक्टर सागर
Updated on:
25 Apr 2026 05:28 pm
Published on:
25 Apr 2026 05:26 pm
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