18 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सर्जरी के बिना दिमाग को मिलेगा नया ‘स्पार्क’, भारतीय मूल के प्रोफेसर ने हासिल कि ऐतिहासिक उपलब्धि

भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफेसर अशोक शेट्टी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय मूल के प्रोफेसर ने मस्तिस्क के लिए खास नेजल स्प्रे की खोज की है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Apr 19, 2026

Scientist developed nasal spray to boost memory

सांकेतिक AI इमेज

वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क को फिर से युवा बनाने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफेसर अशोक शेट्टी ने एक खास नेजल स्प्रे विकसित किया है, जो मस्तिष्क की सूजन कम करने के साथ याददाश्त सुधारने और उम्र बढ़ने के असर को कम करने में मदद करता है। यह खोज डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे रोगों के इलाज को नई दिशा दे सकती है।

नई खोज का चूहों पर परीक्षण पूरा

भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफेसर अशोक शेट्टी के नेतृत्व में टेक्सास A एंड M यूनिवर्सिटी की टीम ने मस्तिष्क के लिए खास नेजल स्प्रे विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने चूहों पर किए गए परीक्षण में पाया कि इसकी सिर्फ 2 डोज से ही पुरानी सूजन में तेज गिरावट आई। यह खोज डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे रोगों के इलाज को नई दिशा दे सकती है, हालांकि इंसानों पर परीक्षण अभी बाकी है।

उम्र के साथ बढ़ती मस्तिष्क सूजन

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, मस्तिष्क में धीमी लेकिन लगातार सूजन बनने लगती है। इस स्थिति को 'न्यूरो-इन्फ्लेमेजिंग' कहा जाता है। इससे ब्रेन सेल्स की ऊर्जा घटती है और याददाश्त कमजोर होने लगती है। अब तक इसे उम्र का अपरिवर्तनीय हिस्सा माना जाता था, लेकिन यह शोध इस धारणा को चुनौती देती है।

सर्जरी के बिना सीधे ब्रेन तक पहुंचेगी स्प्रे

अशोक शेट्टी के नेतृत्व में विकसित की गई स्प्रे की खासियत है कि यह नाक के जरिए सीधे ब्रेन टिश्यू तक पहुंचती है। इसलिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसमें मौजूद एक्स्ट्रासेलुलर वेसिकल्स माइक्रोआरएनए छोड़ते हैं, जो सूजन के संकेतों को रोककर कोशिकाओं की ऊर्जा प्रणाली को फिर सक्रिय करते हैं।

कुछ हफ्तों में सुधर गई याददाश्त

चूहों पर किए गए शोध परीक्षण के मुताबिक, कुछ ही हफ्तों में याददाश्त में सुधार देखने को मिला है। यह उपचार नर चूहों और मादा दोनों में समान रूप से प्रभावी रहा। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक केवल लक्षण नहीं दबाती, बल्कि कोशिकाओं को अंदर से मजबूत बनाती है।