
मुस्लिम शख्स ने फिर पेश की मानवता की मिसाल (Photo Source- Input)
Alirajpur News : कहते हैं कि सच्ची दोस्ती न जाति देखती है, न धर्म और न ही कोई सीमा। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में ऐसी ही एक मार्मिक और प्रेरणादायक घटना सामने आई, जिसने इंसानियत और दोस्ती की मिसाल पेश कर दी। यहां एक मुस्लिम युवक ने अपने हिंदू मित्र के निधन के बाद न केवल उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई, बल्कि पूरे विधि-विधान से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर दोस्ती का ऐसा फर्ज निभाया, जिसकी हर ओर चर्चा हो रही है।
यह कहानी है अजमेर के रहने वाले अशोक सिंह सोलंकी और उनके दोस्त सुल्तान गनी की। दोनों की दोस्ती करीब तीन दशक पुरानी थी। समय के साथ जीवन की परिस्थितियां बदलती रहीं, लेकिन दोनों के बीच विश्वास, अपनापन और भाईचारे का रिश्ता कभी कमजोर नहीं पड़ा।
जानकारी के अनुसार, निजी कंपनी में ड्राइवर के रूप में कार्यरत अशोक सिंह सोलंकी बीते दिनों मालवई गांव के पास एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। अशोक के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था। परिवार में ऐसा कोई करीबी परिजन मौजूद नहीं था जो अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाल सके। ऐसे कठिन समय में उनके मित्र सुल्तान गनी आगे आए और उन्होंने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
मित्र की मृत्यु की खबर मिलते ही सुल्तान गनी अस्पताल पहुंचे। जब उन्हें पता चला कि अंतिम संस्कार के लिए कोई परिजन मौजूद नहीं है तो उन्होंने बिना किसी संकोच के अपने मित्र को अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। समाजसेवी दीपक दीक्षित और राकेश चौहान के सहयोग से सुल्तान गनी ने पंचेश्वर मुक्ति धाम में अशोक सिंह सोलंकी का हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कराया। अंतिम यात्रा से लेकर चिता को अग्नि देने तक की सभी व्यवस्थाएं उन्होंने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न कराईं।
अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। हर कोई इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठा। सुल्तान गनी का कहना था कि अशोक केवल मित्र नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह थे। जीवनभर साथ निभाया तो अंतिम समय में उन्हें अकेला कैसे छोड़ सकता था। उन्होंने कहा कि दोस्ती का रिश्ता किसी धर्म या समुदाय का मोहताज नहीं होता। इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और मित्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना उनका कर्तव्य था।
सुल्तान गनी ने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद वे अशोक सिंह सोलंकी की अस्थियों को भी हिंदू परंपरा के अनुसार पुष्कर ले जाकर विसर्जित करेंगे, ताकि उनके मित्र की सभी धार्मिक मान्यताओं का सम्मानपूर्वक पालन हो सके।
Updated on:
06 Jun 2026 07:07 am
Published on:
06 Jun 2026 07:07 am
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