
अहमदाबाद. शहर के साबरमती रिवरफ्रंट के समीप बनाई गई अध्यात्मनगरी में एक ही मंडप के नीचे सोमवार को 35 मुमुक्षुओं ने एक साथ जैन दीक्षा ली। दावा किया गया है कि अहमदाबाद में 500 वर्ष के इतिहास में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है। आचार्य विजय योगतिलक सूरीश्वर के हाथों से यह दीक्षा उत्सव किया गया।रिवरफ्रंट के समीप तीन लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बनी अध्यात्मनगरी में सोमवार सुबह साढ़े पांच बजे से ही दीक्षा समारोह शुरू हो हुआ। 30 हजार की क्षमता वाला यह मंडप कुछ ही देर में खचाखच भर गया।
इस मंडप में 15 आचार्यों के साथ-साथ करीब 400 जैन साधु-साध्वियों की छत्रछाया में मुमुक्षुओं को साधु जीवन के प्रतीक स्वरूप ओघो अर्पण करने की विधि सुबह 7.35 बजे शुरू हुई, जो 25 मिनट तक चली। मुमुक्षुओं में 15 पुरुष और 20 महिलाएं शामिल हैं। ओघो अर्पित किए जाने के बाद इन मुमुक्षुओं के सांसारिक नाम का त्याग किया गया और साधु जीवन के नए नाम दिए गए। गौरतलब है कि शहर में 35 दीक्षा महोत्सव की शुरुआत गत 18 अप्रेल को सामैया से शुरू हुई थी। इसके बाद रविवार को वर्षीदान की यात्रा निकाली गई और उसके बाद सोमवार को दीक्षा उत्सव आयोजित किया गया। पांच दिवसीय इस महोत्सव से लगभग पांच लाख लोग लाभान्वित हुए।
Published on:
22 Apr 2024 10:19 pm
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