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जानिए, पाकिस्तान क्या कर रहा है पश्चिमी सीमा पर नापाक हरकतें

पश्चिमी सीमा के बॉर्डर पर पाकिस्तान की हरकतें बढऩे लग गई है।हेरोइन के खेप, अत्याधुनिक पिस्टल, बकरियों का समूह ,तारबंदी लांघने की एक के बाद एक वारदातें हुई है।

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केस-1
स्वरूपे व मियें का तला के पास में अगस्त 2024 में पाकिस्तान की ओर से 200 बकरियां भारत की सीमा में घुस आई। जहां से बकरियां घुसी वहीं पर तारबंदी काटने की घटना भी हुई। घुसपैठ की नाकाम कोशिश ने यहां खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े किए।
केस-2
17 जनवरी को चार पिस्टल भभूते का तला की सीमा के पास में बरामद हुई। आस्ट्रेलियन कंपनी की ये पिस्टल पाकिस्तान से भारत में डंप की गई थी, जिसे बीएसएफ ने भभूते का तला के पास में बरामद किया। भभूते का तला कुख्यात स्थल है,जो तस्करी नेटवर्क से जुड़ा रहा है।
केस-3
पाकिस्तान ने हाल ही में टूरिस्ट रेल को जीरो प्वाइंट रेलवे स्टेशन तक लाकर टूरिस्ट को भ्रमण करवाना शुरू कर दिया है। बॉर्डर पर गतिविधियां बढ़ रही है। पाक रैंजर्स भी अब मुनाबाव के पास में अतिरिक्त तैनातगी कर रहे है ।

बाड़मेर
पश्चिमी सीमा के बॉर्डर पर पाकिस्तान की हरकतें बढऩे लग गई है।हेरोइन के खेप, अत्याधुनिक पिस्टल, बकरियों का समूह ,तारबंदी लांघने की एक के बाद एक वारदातें हुई है। पाकिस्तान की टूरिस्ट रेल के जीरो प्वाइंट पर आने और पाक रैंजर्स की मुनाबाव के सामने अतिरिक्त तैनातगी ने अब भारत के बॉर्डर पर खुफियां तंत्र को भी अतिरिक्त चौकसी की जरूरत महसूस करवाई है, लेकिन यहां बॉर्डर इंटेलीजेंस(बीआइ) की 24 चौकियां 15 साल से बंद है। इन चौकियों में तैनात स्टाफ नापाक हरकतों को पहले से भांपने और सचेत होने के लिए जाना जाता था।
भारत पाक बॉर्डर बॉर्डर इंटेलिजेस (बीआइ) की 24 चौकियां चार जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्री गंगानगर में स्थापित थी। इन चौकियों में तैनात स्टाफ राजस्थान से लगती भारत-पाक सीमा की हर हरकत पर नजर रखता। इसकी सूचना तत्काल केन्द्र सरकार तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका में रहा। वर्ष 2009 में इन चौकियों को बंद कर दिया गया। चौकियां बंद होते ही खुफिया एजेंसियों ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर इन चौकियों को पुन: प्रारंभ करने की महत्ता भी बताई है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
रक्षामंत्री ने किया था दावा
रक्षामंत्री राजनाथसिंह के2016 में जैसलमेर और 2017 में बाड़मेर के दौरे में इन चौकियों को फिर से शुरू करने की बात कही थी,लेकिन यह भी आगे नहीं बढ़ी। आठ साल बीतने के बावजूद प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। जबकि बॉर्डर की सुरक्षा में तैनात बीएसएफ व पुलिस सरकार को कई बार पत्र लिख चुके है।
क्लू ही नहीं मिल रहा
बाड़मेर में वर्तमान में इंटेलिजेंस के पास 50 का स्टाफ पदस्थापित है, लेकिन इनके लिए मात्र एक चार पहिया वाहन व कुछ बाइक है। वहीं डिजिटल युग में स्टाफ के पास मोबाइल के अलावा कोई आधुनिक तकनीकी उपकरण भी नहीं है। चौकियां बंद होनेे से उन्हें पाकिस्तान की ओर से होने वाली नापाक हरकत या भारत की सीमा में इनके नेटवर्क को लेकर क्लू नहीं मिल रहा है।
कहां कितनी बंद चौकियां
बाड़मेर- केलनोर, गांधव, पांचल, खलीफे की बावड़ी, जानपालिया, हरसाणी, गागरिया, सेड़वा।
जैसलमेर - शाहगढ़, सुलताना, दबड़ी, धनाना, चिनू, देवीकोट, सम, बाहला, खोईयाळा, भारेवाला।
श्री गंगानगर -केसरीसिंहपुर, रावला, गजसिंपुर।
बीकानेर - पुंगल, रणजीतपुरा।