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चार माह विश्राम के लिए गए भगवान विष्णु, विवाह सहित शुभ कार्यों पर लगा विराम

देवशयनी एकादशी पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर की पूजा-अर्चना पन्ना. देवशयनी एकादशी पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम का भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु पृथ्वी के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव को सौंपकर विश्राम करने चले जाते हैं। इसी के साथ चार माह शुभ और […]

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चार माह विश्राम के लिए गए भगवान विष्णु

चार माह विश्राम के लिए गए भगवान विष्णु

देवशयनी एकादशी पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर की पूजा-अर्चना

पन्ना. देवशयनी एकादशी पर महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम का भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु पृथ्वी के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव को सौंपकर विश्राम करने चले जाते हैं। इसी के साथ चार माह शुभ और मांगलिक कार्य नहीं होते। इस अवधि में धर्म-कर्म और आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। चातुर्मास में रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी गणेश चतुर्थी, शारदेय नवरात्र और दीपावली जैसे बड़े पर्व पड़ेेंगे। इन पर्वों से न सिर्फ धर्म-कर्म, आराधना का माहौल पूरे चार महीने बना रहेगा बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी बूस्ट देते हैं।
अक्टूबर में 3 से शारदेय नवरात्र
एकादशी को लेकर महिलाओं ने सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया और दिनभर व्रत रखा। शाम को भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की गई। पूजन करने के बाद महिलाओं ने फलाहार कर व्रत का पारन किया। व्रती महिला सीतादेवी ने बताया, आज से भगवान चार माह के लिए निद्रा में चले जाएंगे। इससे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार का शुभारंभ, कंछेदन, मुंडन, जनेऊ संस्कार सहित अन्य शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है। चातुर्मास के इन चार माह में कई बड़े त्योहार पड़ेंगे। इससे एक ओर लोगों में धार्मिक भावना बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय बाजार को बल मिलेगा, व्यापार बढ़ेगा। जिससे जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अक्टूबर में 3 से शारदेय नवरात्र शुरू होगा। साल के बड़े त्योहार जैसे रक्षा बंधन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गणोशोत्सव, दशहरा और दीपावली इन्हीं चातुर्मास में पड़ेंगे। यह त्योहार मार्केट को भी मजबूती प्रदान करते हैं।
सावन का शुभारंभ और समापन दोनों सोमवार से
इस साल सावन माह में पांच सोमवार पड़ रहे हैं। ऐसा कई सालों बाद हो रहा है कि सावन की शुरुआत और समापन दोनों सोमवार से हैं। सावन की शुरुआत 22 जुलाई से हो रही है। जुलाई में जो प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं उनमें 23 जुलाई को मंगला गौरी व्रत, 25 जुलाई को मौना पंचमी, 27 जुलाई को शीतला अष्टमी, 29 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार और 31 जु़लाई को कामिका एकादशी का व्रत पड़ेगा।
19 अगस्त को रक्षाबंधन, 26 को जन्माष्टमी
अगस्त माह में जो प्रमुख त्यौहार और व्रत हैं उनमें 4 अगस्त को हरियाली अमावस्या, 5 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार, 6 अगस्त को ङ्क्षसधारा दोज, 7 अगस्त को हरियाली तीज, 8 अगस्त को निवायरी चतुर्थी, 9 अगस्त को नागपंचमी, 11 अगस्त को तुलसीदार जयंती, 12 अगस्त को सावन का चौथा सोमवार, 15 को स्वतंत्रता दिवस, पारसी नववर्ष, 19 अगस्त को रक्षाबंधन, 20 अगस्त को कजलिया, 22 अगस्त को कजरी तीज, 24 अगस्त को गांगा पंचमी, 25 अगस्त को हलषष्ठी व्रत, बलदाऊ जयंती, 26 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाएं जाएंगे।
12 को दशहरा, 31 को दीपावली
अक्टूबर माह में जो प्रमुख व्रत त्योहार होंगे उनमें 2 अक्टूबर को पितृमोक्ष अमावस्या, 3 अक्टूबरसे 10 दिनी शारदये नवरात्र प्रारंभ होंगे। इसी दिन महाराजा अग्रसेन जयंती मनाई जाएगी। 10 अक्टूबर को सरस्वती पूजा, निशा पूजा, 11 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी व नवमी, जवारे विसर्जन, 12 अक्टूबर को विजया दशमी पर दशहरा पर्व के साथ शारदेय नवरात्र का समापन हो जाएगा। 13 अक्टूबर को एकादशी, 16 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, 17 अक्टूबरका कार्तिक स् नान प्रारंभ, 20 अक्टूबर को करवार चौथ, 24 अक्टूबर को गहोई अष्टमी, गुरु पुष्य का संयोग, 29 अक्ब्ूबर को धनतेरस, धनवंतरी जयंती, 30 अक्टूबर को छोटी दीवाली, रूप चौदस, नरक चौदस, 30 अक्टूबर को दीवपावली का व्रत मनाया जाएगा।