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इंदौर में NEET की तैयारी कर रही अवंतिका नहीं रही, गांव में नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार

Avantika Prepared NEET : डॉक्टर पिता का अधूरा सपना... बेटी सफेद कोट पहनती, उससे पहले ही बुझ गया जीवन का उजाला। अवंतिका की अंतिम यात्रा उसके गृहग्राम बलवारी खुर्द पहुंची तो गांव का माहौल गमगीन हो गया। नम आंखों और भारी मन से लोगों ने उसे अंतिम विदाई दी।

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Avantika Prepared NEET

Avantika Prepared NEET (डॉक्टर पिता का सपना अधूरा रह गया Photo Source- Input)

Dhar News : एक पिता ने अपनी बेटी के लिए वही सपना देखा था, जिसे कभी उसने खुद अपने जीवन में पूरा किया था। वह चाहता था कि उसकी बेटी भी डॉक्टर बने, लोगों की सेवा करे और परिवार का नाम रोशन करे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टर बनने का सपना देख रही अवंतिका मौर्य अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी असमय मौत ने न केवल एक परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया, बल्कि पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है।

मध्य प्रदेश के धार जिले के गंधवानी इलाके के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलवारी खुर्द में रहने वाली अवंतिका मौर्य सूबे के ही इंदौर शहर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिवार को उम्मीद थी कि, एक दिन वो डॉक्टर बनकर अपने पिता के सपनों को नई उड़ान देगी, लेकिन दो दिन पहले हुए हादसे ने उन सभी उम्मीदों को हमेशा के लिए थाम दिया।

नेता प्रतिपक्ष ने जताया शोक, एक लाख की सहायता

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि, परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव ने युवाओं के भीतर असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा किया है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। सिंघार ने उनकी विधानसभा की बेटी अवंतिका मौर्य के परिवार को एक लाख की आर्थिक सहायता भी प्रदान की है।

नम आंखों और भारी मन से विदाई

शुक्रवार को जब अवंतिका की अंतिम यात्रा उसके गृहग्राम बलवारी खुर्द पहुंची तो गांव का माहौल गमगीन हो गया। नम आंखों और भारी मन से लोगों ने उसे अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक शामिल हुए। हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था, इतनी होनहार बेटी इतनी जल्दी क्यों चली गई?

भीकनगांव में मेडिकल ऑफिसर हैं पिता

अवंतिका के पिता डॉ. बनसिंह मौर्य स्वयं एमबीबीएस डॉक्टर हैं और मौजूदा समय में भीकनगांव में मेडिकल ऑफिसर के पद पर पदस्थ हैं। बेटी की याद में उनका दर्द शब्दों में बयां नहीं हो पा रहा। उन्होंने बताया कि, अवंतिका डॉक्टर बनने के लिए पूरी मेहनत कर रही थी। परिवार को उसके संघर्ष और सपनों पर गर्व था।