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फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश का रुतबा बरकरार, लेकिन कर्ज के दबाव में प्रदेश

नीति आयोग ने जारी की दूसरी वार्षिक फिस्कल-हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट, राज्य का पूंजीगत व्यय पिछले पांच वर्षों में दोगुना हो गया है, जिससे आधारभूत ढांचा मजबूत हो रहा... लेकिन कर्ज, ब्याज और पेंशन ने बिगाड़ी वित्तीय स्थिति

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MP news: नीति आयोग द्वारा जारी दूसरी वार्षिक फिस्कल-हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में मध्यप्रदेश ने 'परफॉर्मर स्टेट' का दर्जा बरकरार रखा है। देश के 18 राज्यों में मध्यप्रदेश की रैंक 10वीं है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में राजस्व प्राप्तियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में तेजी से बढ़ीं, जो जीएसटी, आबकारी और व्यापार करों में प्रभावी सुधार का संकेत देती हैं। हालांकि , राजस्व व्यय आर्थिक विस्तार से आगे निकल रहा है। इसका मुख्य कारण लगातार ऋण लेने से बढ़ती ब्याज देनदारियां और पेंशन व्यय है, जो कुल राजस्व व्यय का 43 प्रतिशत से अधिक हो गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य का पूंजीगत व्यय पिछले पांच वर्षों में दोगुना हो गया है, जिससे आधारभूत ढांचा मजबूत हो रहा है।

कर्ज की बढ़ती देनदारियां राजकोषीय लचीलापन कम कर रही

हालांकि कर्ज की बढ़ती देनदारियां एमपी के राजकोषीय लचीलापन (फ्लेसिबिलिटी) कम कर रही हैं। सकारात्मक पक्ष यह है कि राज्य का कर्ज अभी भी वैधानिक सीमाओं के भीतर बना हुआ है। नीति आयोग ने कहा है कि ऋण चुकाने के लिए उधार पर बढ़ती निर्भरता और बढ़ते ब्याज भार के बीच राजकोषीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खर्च पर नियंत्रण और कुशल ऋण प्रबंधन जरूरी है।

कुल राजस्व का 9.87 फीसदी ब्याज भुगतान में

रिपोर्ट के अनुसार ऋण जीएसडीपी अनुपात वर्ष 2022-23 में 28.32 प्रतिशत से बढ़क र 2023-24 में 29.17 प्रतिशत हो गया, जो 0.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और 2019-24 की तुलना में 4.32 प्रतिशत अधिक है। यह एमपीएफ आरबीएम अधिनियम की निर्धारित सीमा के भीतर है।

राज्य को प्राथमिक घाटा

राजस्व प्राप्तियों के मुकाबले ब्याज भुगतान का अनुपात 2019-24 के दौरान 9.54 से 10.87 प्रतिशत के बीच रहा। यह 2022-23 में 9.54 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 9.87 प्रतिशत हो गया। 2021-22 से 2023-24 तक डोमर गैप सकारात्मक रहने के बावजूद राज्य को प्राथमिक घाटा हुआ और ऋण प्राप्तियों का 33 से 37 प्रतिशत हिस्सा ऋण सेवा में ही उपयोग किया गया। यह दर्शाता है कि ऋण को स्थायी रूप से प्रबंधित करने को पर्याप्त नहीं है।

कर संग्रह से सुधर रही वित्तीय स्थिति

उप मुपख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि रिपोर्ट में राजस्व प्रदर्शन का सकारात्मक आकलन राज्य की विकासोन्मुख नीतियों का प्रमाण है। राज्य सरकार पूंजीगत व्यय को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है, जो एक नया कर्तिमान होगा।