
राजाधिराज भगवान महाकाल का दरबार महाशविरात्रि के अवसर पर रोशनी से जगमगा रहा है। शिवरत्रि के दिन महाकाल बाबा को दूल्हे के रुप में सजाया जाता है और लाखों की संख्या में भक्त उनके बाराती बनकर आशीर्वाद प्राप्त करते है। श्री महाकालेश्वर मंदिर में वर्ष में एक ही बार महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भगवान महाकाल को सवा मन का पुष्प मुकुट (सेहरा) धारण कराया जाता है। महाकाल बाबा को सवा मन फूलों-फलों का पुष्प मुकुट बांधकर सोने के कुण्डल, छत्र व मोरपंख, सोने के त्रिपुण्ड से सुसज्जित किया जाता है।
शुक्रवार, 21 फरवरी यानी महाशिवरात्रि के दिन को भोले के दरबार में महाशिवरात्रि पर्व की धूम रहेगी। भगवान श्री महाकालेश्वर का सतत जलधारा से अभिषेक होगा। वहीं चंदन श्रृंगार में वे भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान को पुष्प मुकुट धारण करवाने की तैयारी शुरू होगी। 22 फरवरी को सुबह से लेकर दोपहर 10.30 बजे पुष्प मुकुट श्रृंगार के दर्शन होंगे। इसके बाद 12 बजे भस्म आरती होगी, जो वर्ष में एक बार ही दोपहर में होती है।
पुजारी-पुरोहित के अलावा किसी को नहीं मिलेगा गर्भगृह में प्रवेश
महाशिवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन के संबंध में राज्य सरकार के निर्णयानुसार जिले के प्रभारी मंत्री ने निर्देश दिए थे कि, पर्व के दिन पुजारी-पुरोहितों के अलावा गर्भगृह में आम और वीआइपी का प्रवेश निषेध रहेगा।
हर दिन हुए बाबा महाकाल के अनूठे शृंगार
शिवरात्रि के नौ दिन पहले 13 फरवरी से शिवरात्रि पर्व मनाया गया। इस दौरान हर दिन संध्या कालीन आरती के पहले बाबा महाकाल के अनूठे शृंगार हुए। भक्तों ने विविध स्वरूपों में बाबा के दर्शन किए। पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार भगवान महाकाल को दूल्हा स्वरूप में सजाया जाता है। इसीलिए ये विविध शृंगार होते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
महाशिवरात्रि के पर्व पर भव्य रुप से महाकाल पूजा की जाती है और उनसे आशीर्वाद लेने बड़ी संख्या में पहुंचते हैं इसलिये व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम यहां प्रशासन द्वारा किये जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टी से इस साल भी यहां पुख्ता इंतजाम किये गये हैं।
Updated on:
21 Feb 2020 10:14 am
Published on:
21 Feb 2020 10:10 am
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