
नरङ्क्षसहपुर. चंद दिनों बाद शुरू होने जाने जा रहे खरीफ सीजन की बुवाई के लिए बाजारों में विभिन्न प्रकार के बीजों की खरीद फरोख्त का बाजार गर्म हो गया है, लेकिन वर्तमान में बाजार में मिल रहे विभिन्न कंपनियों के बीजों की प्रमाणिकता संदेह के घेरे में है। वहीं बाजार में उपलब्ध दर्जनों किस्म के ब्रांडों के कारण किसानों में भी भ्रम की स्थिति बनी है। यहां चिंता का वषय है कि कृषि विभाग के पास भी खरीफ सीजन की ङ्क्षजसों का बीज उपलब्ध नहीं हैं। लिहाजा किसान बाजार के भरोसे हैं। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि बाजार में बिकने वाले बीजों और कीटनाशकों की प्रमाणिकता की सुनिश्चित करने के लिए अमले द्वारा लगातार निरीक्षण और सेंपङ्क्षलग की कार्रवाई की जा
रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक जिले में निरीक्षण की 73 कार्रवाइयां की जा चुकी है। इस दौरान 116 सैंपल बीज के,125 उर्वरकों के और 12 सैंपल कीटनाशकों के लिए गए हैं। जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। हालांकि इसमें समस्या यह है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आएगी तो घटिया बीज लेने के बाद किसान ठगा हुआ महसूस करेंगे। बोवनी के लिए समय कम मिलेगा रिपोर्ट आने तक किसानों का बड़ा नुकसान हो सकता है और जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है।
जिले में पिछले सालों में मक्के की खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ा है जिसके चलते रकबे में भी वृद्धि हुई है। इस बार भी कृषि विभाग ने जिले में मक्के लिए करीब 50 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है।
बाजार में भी मक्के बीजों की खरीद फरोख्त जोर शोर से चल रही है, लेकिन इसमें महत्वपूर्ण बात यह है दिसंबर जनवरी के माह में महज दो हजार से 21 सौ रुपए प्रतिङ्क्षक्वटल की दर से बिकने वाले मक्के का बीज वर्तमान में हाइब्रिड सीड के नाम पर तीन सौ से पांच सौ रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है।
नए ब्रांडों के बीज
बीज की दुकानों पर दर्जन भर से अधिक कंपनी का नाम बताकर मक्का का बीज बेचने का काम प्रारंभ हो गया है। बड़ी कंपनियों को छोडकऱ कई ऐसे नाम हैं जिनका नाम कहीं बीज उत्पादन के लिए नहीं सुना गया है, लेकिन उसका बीज भी बेचा जा रहा है। इसमें दाम को लेकर भी विभाग का सीधा हस्तक्षेप नहीं होने के कारण किसान परेशान हो रहे हैं।
&सरकारी स्तर से मक्के का बीज नहीं मिलने के कारण बाजार से ही लेना मजबूरी है। लेकिन इसमें भी विक्रेता दुकानदार बीज को लेकर किसी प्रकार की लिखित गारंटी नहीं देते हैं। इसके अलावा कई प्रकार के ब्रांड होने के कारण भ्रम की स्थिति बनती है। हम परेशान हैं कि आखिर कौनसा बीज उपयोग में लाएं।
अनुरेश परिहार कृषक बहरपौड़ी
&बाजार में कई प्रकार के बीज तो मिल रहे हैं, लेकिन वे हाइब्रिड के नाम पर बेहद महंगे हैं। फसल आने के बाद जिस मक्के के दाम दो सौ रुपए प्रति किलो रहते हैं उसी का बीज दो हजार रुपए में साढ़े तीन किलो की पैङ्क्षकग मिल रही है। हाल ही में हमने सिर्फ 24 किलो बीज के लिए साढ़े सात हजार रुपए दाम चुकाए हैं।
प्रकाश सिलावट किसान धमना
&किसानों को दुकानदारों से पक्का बिल लेना चाहिए। ताकि भविष्य में होने वाली परेशानी की स्थिति में उसका उपयोग किया जा सके। बीजों की प्रमाणिकता की जांच के लिए विभागीय अमले द्वारा लगातार सेंपङ्क्षलग की जा रही है। अभी तक बीज, खाद और कीटनाशकों के दौ सौ से अधिक सैंपल लिए जा
चुके हैं।
उमेश कटहरे डीडीए नरङ्क्षसहपुर
Published on:
12 Jun 2024 06:14 pm
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