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मंगलवार के दिन इस एक उपाय से; मांगलिक दोष, गंभीर बीमारियों, विवाह और करियर से जुड़ी समस्याओं तक से पा सकते हैं मुक्ति

Mangalwar Ke Upay: मान्यता है जो व्यक्ति सच्चे दिल से इस पाठ को करता है उसके जीवन के कई कष्टों का अंत तुरंत ही हो जाता है।

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मंगलवार के दिन इस एक उपाय से; मांगलिक दोष, गंभीर बीमारियों, विवाह और करियर से जुड़ी समस्याओं तक से पा सकते हैं मुक्ति

Tuesday Astro Tips: मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में बेहद ही खास माना जाता है। क्योंकि इस दिन भगवान हनुमान की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं जो व्यक्ति सच्चे मन से बजरंगबली की अराधना करता है उसके सारे दुखों का नाश हो जाता है। श्री राम भक्त हनुमान को प्रसन्न करने के लिए लोग इस दिन हनुमान चालीसा का विशेष रूप से पाठ करते हैं। लेकिन इसी के साथ एक और चीज है जिससे भगवान हनुमान शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। वो है बजरंग बाण का पाठ। मान्यता है जो व्यक्ति सच्चे दिल से इस पाठ को करता है उसके जीवन के कई कष्टों का अंत तुरंत ही हो जाता है।

बजरंग बाण का पाठ इन समस्याओं से दिलाता है मुक्ति:
-यदि विवाह में किसी प्रकार की समस्या आ रही है तो कदली पेड़ के नीचे बैठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इससे हनुमान भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
-अगर आप पर ग्रह दोष है तो सुबह सूर्योदय से पहले उठकर बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इस दौरान आटे से बना दिया जरूर जलाएं। मान्यता है इससे ग्रह दोषों से मुक्ति मिल जाती है।
-अगर किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी से परेशान हैं तो राहुकाल में हनुमान जी को 21 पान के पत्ते अर्पित करके बजरंग बाण का पाठ करें और हां इस दौरान घी का दीपक जलाना न भूलें।
-कार्यक्षेत्र में सफलता पाना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन व्रत रखें और हनुमान जी की विशेष पूजा अर्चना के बाद बजरंग बाण का पाठ जरूर करें। इससे नौकरी और बिजनेस संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
-अगर वास्तु दोष है तो रोजाना तीन बार बजरंग बाण का पाठ करें। इसके साथ ही घर में पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति रखें।
-मांगलिक दोष से परेशान हैं तो प्रत्येक मंगलवार को बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।

बजरंग बाण
दोहा
"निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।"
"तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥"

"चौपाई"
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महासुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु महि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाई लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परमपद लीन्हा।।
बाग़ उजारि सिन्धु महँ बोरा। अति आतुर जमकातर तोरा।।
अक्षयकुमार को मारि संहारा। लूम लपेट लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुरपुर में भई।।
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु उर अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होय दुख हरहु निपाता।।
जै गिरिधर जै जै सुखसागर। सुर समूह समरथ भटनागर।।
ॐ हनु हनु हनुमंत हठीले। बैरिहिंं मारु बज्र की कीले।।
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो।।
ऊँकार हुंकार प्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ऊँ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा।।
सत्य होहु हरि शपथ पाय के। रामदूत धरु मारु जाय के।।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत हौं दास तुम्हारा।।
वन उपवन, मग गिरिगृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पांय परों कर ज़ोरि मनावौं। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
जय अंजनिकुमार बलवन्ता। शंकरसुवन वीर हनुमन्ता।।
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बेताल काल मारी मर।।
इन्हें मारु तोहिं शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की।।
जनकसुता हरिदास कहावौ। ताकी शपथ विलम्ब न लावो।।
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा।।
चरण शरण कर ज़ोरि मनावौ। यहि अवसर अब केहि गोहरावौं।।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई। पांय परों कर ज़ोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपत चलंता। ऊँ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता।।
ऊँ हँ हँ हांक देत कपि चंचल। ऊँ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै। ताहि कहो फिर कौन उबारै।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
यह बजरंग बाण जो जापै। ताते भूत प्रेत सब काँपै।।
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहै कलेशा।।

"दोहा"

प्रेम प्रतीतहि कपि भजै, सदा धरैं उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान।।

इस प्रकार से करें बजरंग बाण का पाठ: इस पाठ को शुरू करने से पहले गणेश भगवान की अराधना करें। इसके बाद श्री राम जी और सीता जी का ध्यान करें। इसके बाद बजरंगबली से अपनी मनोकामना कहें। फिर बजरंग बाण का पाठ करने का संकल्प लें। फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें। इसके बाद बजरंग बाण पढ़ें।

बजरंग बाण को पढ़ने के नियम:
-इस पाठ को करने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं। फिर स्नान कर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें।
-कुश से बने आसन पर बैठकर बजरंग बाण पढें।
-हनुमान जी को फूल अर्पित करें और उन्हें धूप, दीप दिखाएं।
-ध्यान रखें कि बजरंग बाण पढ़ने समय सभी शब्दों का उच्चारण सही रखें।
-पाठ समाप्त करने के बाद हनुमान भगवान को चूरमा, लड्डू और अन्य मौसमी फलों का भोग जरूर लगाएं।
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(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।)

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