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महापौर राकेश पाठक बोले, स्वच्छता रैंकिंग में छलांग लगाई, निगम की सौगात दिलाई

भीलवाड़ा शहर के प्रथम नागरिक का दायित्व जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से निभाते हुए साढ़े चार साल से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है। नगरीय निकाय की जिम्मेदारी पूर्ण सफर के दौरान वस्त्रनगरी को विकास की कई सौगात दी। कोरोना संकट काल से लेकर कार्यकाल के हर मोड पर आमजन के हितों का ध्यान रखा। यह कहना है नगर निगम महापौर राकेश पाठक का।

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भीलवाड़ा। भीलवाड़ा शहर के प्रथम नागरिक का दायित्व जिम्मेदारी पूर्ण तरीके से निभाते हुए साढ़े चार साल से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है। नगरीय निकाय की जिम्मेदारी पूर्ण सफर के दौरान वस्त्रनगरी को विकास की कई सौगात दी। कोरोना संकट काल से लेकर कार्यकाल के हर मोड पर आमजन के हितों का ध्यान रखा। यह कहना है Nagar nigam bhilwara mahapor rakesh pathk नगर निगम महापौर राकेश पाठक का। पाठक ने राजस्थान पत्रिका के वरिष्ठ रिपोर्टर नरेन्द्र वर्मा से बातचीत में कहा कि चुनौतियां बहुत है, अच्छा कार्य करने के बावजूद शिकायतें भी सुनने को मिली। कार्यशैली पर सवाल उठे, लेकिन विकास के संकल्प के साथ मैं, टीम के साथ आगे बढ़ता गया। महापौर से हुई बातचीत के प्रमुख अंश।

सवाल: साढ़े चार साल के कार्यकाल के बारे में क्या कहेंगे ?

जवाब: पांच साल के कार्यकाल गौरवांवित महसूस करने वाला समय कोरोना संकट काल का रहा। संकट काल में हमने जनता की दिल से सेवा की। भोजन, दवा, आवास की बेहतर व्यवस्था की। अंतिम संस्कार से लेकर अिस्थ विसर्जन तक में निगम की पूरी टीम ने आत्मीयता से कार्य किया।

सवाल: निगम के लिए बेहतर कार्य क्या मानते है ?

जवाब: अभी तक हमारे कार्यकाल में चालीस करोड़ की भूमि बिक चुकी है, हमारा लक्ष्य 70 करोड़ का है। नगर विकास न्यास से भी बारह करोड़ से अधिक राशि लाए। निगम बेड़े में पांच नई दमकल शामिल की। शहर में ऑटो टिपर की संख्या भी पचास से बढ़ा कर सौ की। तीन वर्ष में आठ नए डम्पर व तीन नई जेसीबी खरीदी। ठोस कचरा प्रबंधन का बजट हमने पांच से आठ करोड़ सालाना किया।

सवाल: सबसे अच्छी सौगात क्या मानते है ?

जवाब: परिषद से नगर निगम का दर्जा मिलना और देश की स्वच्छता रैंकिंग मेें भीलवाड़ा की छलांग लगाकर संभाग में प्रथम एवं देश में हमारी रैंक 53 वीं तक पहुंचना है। शहर में जल्द ई-बस सेवा का संचालन के लिए स्टैंड बनवाना है।

सवाल: शहर के सौंदर्यीकरण के बारे में क्या कहेंगे ?

जवाब: शहर ग्रीन एवं क्लीन रहे यह प्रयास रहे है। शहर की सभी सरकारी भवन को हमने एक रंग में रंगने की कोशिश की। तोरणद्वार बनाए, महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाई। शहीद स्मारक बनाए। बजरंगी सर्कल विकसित किया। खेलों को भी बढ़ावा दिया। दीपोत्सव पर महाआरती का अनूठा आयोजन शुरू किया। इस बार निगम की ओर से सावन मेें शिवालयों में सहस्त्रधारा अभिषेक करवाया।

सवाल: प्रशासन का कितना सहयोग रहा?

जवाब: जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों ने कार्यकाल में निगम को ऊंचाई में ले जाने में अहम योगदान दिया। सभी जिला कलक्टर्स व सांसद का पूर्ण सहयोग रहा। डीएमएफटी फंड से भी निगम को कोष मिला है।

सवाल: रोल मॉडल के बारे में क्या सोचते है ?

जवाब: रोल मॉडल के रूप में हम भीलवाड़ा को प्रदेश में स्थापित करेंगे। इसके लिए आगामी दिनों में प्रति माह एक से डेढ़ करोड़ रुपए गंदे पानी से निगम को आय की महत्वकांक्षी योजना तैयार की है।

सवाल: वह काम जो आप करना चाहते थे, लेकिन पांच साल में अधूरे रह?

जवाब: आर्ट गलैरी का कार्य कुछ कारण से शुरू नहीं हो सका। भीलवाड़ा में विभिन्न आयोजन के लिए बीस हजार स्कवायर फीट का शेड बनाने की भी इच्छा थी, रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद भी नहीं हो सकी। शहर में जिंदल की मदद से एक और ओवरब्रिज का कार्य एनजीटी के कारण फिलहाल लंबित है। कर्मचारियों की कमी भी आड़े आई है।

सवाल: नए कार्य जो अभी शुरू किए है ?

जवाब: शहर में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए एक नया बरसाती नाला रोडवेज बस स्टैंड से केशव

हॉस्पीटल तक बनवाने का टेंडर हो गया है तथा शास्त्रीनगर नाले का निर्माण कार्य करवाया जाएगा।

सवाल: अभी तक के कार्यकाल के दौरान आप पर कई मौकों पर आरोप भी लगे है, ऐसा क्यूं ?

जवाब: लोकतंत्र में विरोध का अपना स्थान है, विरोध का मैं स्वागत करता हूं, लेकिन लोग विरोध के लिए विरोध करें यह जायज नहीं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में मेरा तीन स्तर पर विरोध हुआ, इनमें शिकायतों का दौर बड़ा था, इसमें सभी में क्लीन चिट मिली। सोशल मीडिया पर भी गिनती के लोगों ने मेरी छवि प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सकें। धरने-प्रदर्शन का फार्मूला भी फेल हुआ। हालांकि सफलता के लिए विरोध का पक्ष भी जरूरी होता है।