25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नीट विवाद: ग्रेस मार्क्स देने में तमिलनाडु सरकार ने केंद्र को लिया आड़े हाथ

health Minister Ma Subramanian

2 min read
Google source verification
health Minister Ma Subramanian

चेन्नई. तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को चिकित्सकीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) के आयोजन में कथित अनियमितता को लेकर केंद्र की आलोचना की और कहा छात्रों को ग्रेस मार्क्स देना अस्वीकार्य है क्योंकि यह धोखाधड़ी के समान है। राज्य के चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री एमए सुब्रमण्यन ने कहा राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा के खिलाफ देशभर में बढ़ते आक्रोश और विरोध ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की इस परीक्षा को समाप्त करने की बार-बार की गई अपील को और बल दिया है। सुब्रमण्यन ने कहा, परीक्षा के संचालन, खासकर ग्रेस मार्क्स देने के कारण होने वाली अनियमितता और भ्रम के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को दोषी ठहराया जाना चाहिए। ग्रेस मार्क्स देने का आधार क्या था और क्या इस निर्णय के बारे में 'नीट' के उम्मीदवारों को सूचित किया गया है?

23 लाख अभ्यर्थियों को पहुंची मानसिक पीड़ा
अनियमितता और भ्रम के कारण परीक्षा में शामिल हुए 23 लाख अभ्यर्थियों को मानसिक पीड़ा हुई है। उन्होंने दावा किया कि तमिलनाडु से किसी भी अभ्यर्थी को ग्रेस मार्क्स नहीं दिया गया है। इससे पहले दिन केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 1,563 नीट-यूजी 2024 उम्मीदवारों को ग्रेस मार्क्स देने का निर्णय रद्द कर दिया गया है। इन उम्मीदवार को 23 जून को फिर से परीक्षा में बैठने का विकल्प दिया जाएगा। सुब्रमण्यन ने कहा, राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा को खत्म करने की मांग अब पूरे भारत में सुनी जा रही है। द्रमुक अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी इस परीक्षा को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं। केंद्र सरकार को अब नीट परीक्षा को रद्द करने के लिए आगे आना चाहिए।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एडपाडी के. पलनीस्वामी पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पार्टी प्रमुख और दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के विरोध के बावजूद राज्य में राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा को अनुमति दी। अभ्यर्थियों के लिए न्याय की मांग करते हुए स्वास्थ्य मंत्री सुब्रमण्यन ने कहा राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा ने कई छात्रों, खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के मौके से वंचित कर दिया है।
31 प्रतिशत स्टूडेंट ही पहले प्रयास में इसे पास कर पाते हैं

उन्होंने बताया कि जब से नीट लागू हुई है, सिर्फ 31 प्रतिशत स्टूडेंट ही पहले प्रयास में इसे पास कर पाए हैं, बाकी कई प्रयासों के बाद ही पास हो पाते हैं। क्या गरीब बैकग्राउंड के विद्यार्थी कई प्रयासों के लिए नीट की कोचिंग का खर्च उठा सकते हैं? नीट ने गरीब बैकग्राउंड के स्टूडेंट के लिए मेडिकल की पढ़ाई को दूर का सपना बना दिया है।