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नया सर्वे : भारत में पुरुषों से ज्यादा तनाव में रहती हैं कामकाजी महिलाएं

कामकाज और जीवन में संतुलन की कमी, रिजेक्शन का डर, आत्मसम्मान में कमी और निर्णय संबंधी चिंता (जजमेंटल एंजायटी) के कारण महिलाओं में तनाव या चिंता रहती है।

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नई दिल्ली. हाल ही एक मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण में सामने आया कि भारतीय कामकाजी महिलाएं, पुरुषों की तुलना में ज्यादा तनाव अनुभव करती हैं। ‘योर दोस्त’ के इस सर्वे में पांच हजार से अधिक भारतीय पेशेवरों से जवाब मांगे गए। सर्वे में प्रतिभागियों ने कार्यस्थल और जिम्मेदारियों को लेकर होने वाले तनाव के बारे में खुलकर जवाब दिए।

  • 72.2 फीसदी कामकाजी महिलाओं और 53.64 फीसदी पुरुषों ने माना वे बहुत ज्यादा तनाव में हैं।
  • 18 फीसदी महिलाओं, जबकि 12 फीसदी पुरुषों को काम और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।
  • 9.27 फीसदी मामलों में पुरुष उदास होते हैं, जबकि महिलाएं 20 फीसदी मामलों में ऐसा महसूस करती हैं।
  • 64 फीसदी युवा कर्मचारी सबसे ज्यादा तनाव महसूस करते हैं।
  • 31 से 40 आयु वर्ग के कर्मचारी 59.18 फीसदी के साथ उच्चतम तनाव का स्तर झेलते हैं, जबकि 41 से 50 आयु वर्ग के कर्मचारियों में तनाव का यह स्तर अपेक्षाकृत कम होता है।

इन सेक्टर्स में ज्यादा
हेल्थकेयर-अस्पताल, रियल एस्टेट, थोक कारोबार और मनोरंजन सहि 17 उद्योगों में तनाव का स्तर सबसे ज्यादा है।

महिलाओं में तनाव के कारण
सर्वे में सामने आया कि कामकाज और जीवन में संतुलन की कमी, रिजेक्शन का डर, आत्मसम्मान में कमी और निर्णय संबंधी चिंता (जजमेंटल एंजायटी) के कारण महिलाओं में तनाव या चिंता रहती है।