17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पत्रिका एक्सक्लूजिव: कोटा स्टोन से भोपाली बटुआ तक, सबूतों की कमी से GI टैग के 826 प्रस्ताव लंबित

राज्य सरकारों की तैयारी और दस्तावेजी सबूतों की कमी के कारण देश में 826 देसी उत्पादों के GI टैग आवेदन लंबित हैं। कोटा स्टोन, भोपाली बटुआ और इंदौरी जीरावन जैसे उत्पाद भी अटके हैं, जिससे किसानों, कुटीर उद्योगों और MSME को संभावित बाजार और रोजगार के अवसरों का लाभ नहीं मिल पा रहा।

2 min read
Google source verification
Products

Products(AI Image-ChatGpt)

(जितेन्द्र चौरसिया)- राज्य सरकारों की तैयारी की कमी के चलते देश में विभिन्न प्रदेशाें के देसी उत्पादों को जीआई (ज्योग्राफिकल इंडिकेशन) टैग देकर नेशनल व ग्लोबल मार्केट तक भेजने की योजना फिलहाल परवान नहीं चढ़ रही। जीआई टैग देने वाली केंद्र सरकार की संस्था एपिडा को राज्य सरकारों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों को तकनीकी तौर पर प्रमाणित नहीं किए जाने के कारण देश में 826 आवेदन लंबित हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि इनमें राजस्थान के विख्यात कोटा स्टोन, मध्यप्रदेश के भोपाली बटुए व इंदौरी जीरावन जैसे उत्पादों को जीआई टैग मिलने का प्रस्ताव भी अटका हुआ है। तीनों राज्यों के 114 जीआई टैग आवेदन अभी लंबित हैं जिनमें से तीन दर्जन प्रस्ताव खारिज होने के कगार पर हैं। जीआई टैग मिलने पर नेशनल व ग्लोबल मार्केट में खास देसी उत्पादों की विशिष्ट पहचान बनती है और उच्च मानदंडाें के कारण क्वालिटी, डिजाइन सुनिश्चित होने से व्यापार लाभकारी होता है। टैग नहीं मिलने से राज्यों में किसानों, छोटे उद्योगों (एमएसएमई), कुटीर उद्योग व हैंडीक्राफ्ट और स्टार्ट-अप उद्यमियाें को लाभ नहीं मिल रहा है। इससे रोजगार की संभावना पर भी असर पड़ रहा है।

सबूत के अभाव में अटका है प्रमाणन


जीआई टैग विशिष्ट भौगोलिक पहचान के आधार पर दिया जाता है। इसके लिए उत्पाद की निर्माण शैली, गुणवत्ता, जलवायु असर, स्वाद, पहचान, डिजाइन या अन्य विशिष्टता होना अनिवार्य है। इसे साबित करने के लिए दशकों के प्रमाण लगाने होते हैं। सामान्यत: पचास साल से अधिक पुराने विशिष्टता प्रमाण देने होते हैं। जानकार सूत्राें के अनुसार राज्य सरकारें जीआई टैग आवेदन में उत्पाद के इतिहास, गुणवत्ता व विशिष्टता को लेकर स्पष्ट दस्तावेजी प्रमाण और मान्य डॉक्यूमेंटेशन नहीं दे पा रहीं। उत्पादों के पर्यावरणीय प्रभाव को स्पष्ट करने में भी समस्याएं आने से वह जीआई टैग लेने के मापदंड पूरे नहीं कर पा रहे।

शुरुआत दार्जीलिंग चाय से, मोदी सरकार में आई तेजी


देश में जीआई टैग देने की शुरुआत 2004 में दार्जीलिंग चाय से हुई थी लेकिन बाद में इस मामले को ज्यादा प्राथमिकता नहीं मिली। मोदी सरकार ने 2018 से जीआई टैग प्रमाणन को अभियान के रूप में लिया और कोरोना के बाद आत्मनिर्भरता व वोकल फॉर लोकल से जोड़ा। बड़ी संख्या में जीआई टैग के आवेदन के बावजूद तकनीकी दिक्कतों व प्रमाण के अभाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही।

भोपाली बटुए से कोटा स्टोन तक लंबित


मध्यप्रदेश के दो जीआई प्रस्ताव रिजेक्ट होने में इंदौर के चमड़े के खिलौने का लोगो और दतिया व टीकमगढ़ का बेल मेटलवेयर लोगो शामिल है। जबकि, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का अभी तक एक भी प्रस्ताव रिजेक्ट नहीं हुआ है। लेकिन, मप्र व राजस्थान के तीन और छत्तीसगढ़ के दो प्रस्ताव में तकनीकी रूप से दिक्कतें ज्यादा हैं। मध्यप्रदेश के भोपाली बटुए व इंदौरी जीरावन से लेकर राजस्थान के कोटा स्टोन तक के प्रस्ताव लंबे समय से अटके हैं।

ये हैं प्रमुख राज्यों के हालात

मध्यप्रदेश: 23 जीआई टैग मिले, 43 लंबित
मिले: रतलामी सेव, शरबती गेहूं, गोंड पेंटिंग, पन्ना डायमंड
प्रमुख लंबित: सागवान लकड़ी, जोबट पंजा दरी, खुरचन, सोनकच्छ मावाबाटी, भोपाली बटुआ, कटनी मार्बल

राजस्थान: 12 मिले, 52 लंबित
मिले-राजस्थानी कठपुतली, उदयपुर कोफ्तगारी धातु शिल्प, जोधपुर बंधेज शिल्प, नागोरी अश्वगंधा, नाथद्वारा पिछवाई पेंटिंग।
प्रमुख लंबित: अलवर कलाकंद, जोधपुर आयरन क्राफ्ट, नागौरी पान मैथी, जोधपुर मथानिया मिर्ची, बाडमेर जीरा, राजस्थानी जीरा, पुष्कर गुलकंद, भुसावर अचार, कोटा स्टोन, जयपुरी रजवाई, किशनगढ़ पेंटिंग

छत्तीसगढ: 2 मिले, 19 लंबित
मिले: जीराफुल व नगरी दुबराज
प्रमुख लंबित: पनिका साड़ी, बस्तर इमली, विष्णुभोग, धनुष-बाण शिल्प, तिलक कस्तूरी,

फैक्ट फाइल

  • 479 उत्पादों को अब तक मिले जीआई टैग
  • 826 आवेदन अभी कुल लंबित
  • 34 से ज्यादा आवेदन खारिज