
New Civic Bodies and Suburbs to be Established in 5 Districts of MP- demo pic
Bhopal Metropolitan Region - एमपी में मेट्रोपॉटिलन रीजन के तहत बड़ी कवायद की जा रही है। अब इसमें 10 लाख की आबादी पर एक निकाय तय किया जा रहा है। इसमें पूरी प्रशासनिक व्यवस्था होगी। ये एक उपनगर की तरह होगा, जहां लोगों को लंबी दूरी तय किए बिना अपनी जरूरत की वस्तुएं- सेवाएं मिल सकेंगी। नए जुड़े क्षेत्रों को विशेष क्षेत्र के तौर पर विकसित कर उन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन से जोडऩे के उपाय होंगे। ऐसे में भोपाल जिले में करीब 25 लाख आबादी के साथ आसपास के चार अन्य जिलों की 20 लाख आबादी आबादी मिलाकर यहां 5 से अधिक निकाय तय होंगे। इस प्रकार कुल 5 जिलों में नए निकाय और उपनगर बनेंगे। अभी इस पर बीडीए की कंसल्टेंसी एजेंसी प्रस्ताव तैयार कर रही है। अप्रेल 2027 तक प्रस्ताव तैयार हो जाएगा। गौरतलब है कि मेट्रोपोलिटन की नोडल एजेंसी बीडीए को बनाया है।
संभागायुक्त और प्रशासक बीडीए संजीव सिंह के अनुसार भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन का काम तेजी से किया जा रहा है। इसकी प्लानिंग पर वर्क चल रहा है। प्रशासनिक सुविधा के तहत इसे हिस्सों में बांटा जा रहा है। तय समय सीमा में इसे
सबके सामने लाएंगे।
अभी बीडीए ने बतौर नोडल एजेंसी जो नक्शा जारी किया, उसमें भोपाल को मेट्रोपॉलिटन का सेंटर बनाया है। आसपास के जिले के हिस्सों को इसमें गोलाई में जोड़ा गया। स्थिति ये है कि बैरसिया तक का बड़ा भाग मेट्रोपालिटन से बाहर रखा गया
है। इसका विरोध हो रहा है।
सरकार ने इंदौर और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन रीजन बनाना तय किया था। इसमें इंदौर मेट्रोपॉलिटन की डीपीआर का 80 फीसदी काम हो चुका है। भोपाल से करीब एक साल आगे चल रहा है, लेकिन भोपाल में अभी कंसल्टेंट नियुक्त किया। अप्रेल 2027 तक डीपीआर तैयार होगी और फिर जमीनी काम होगा।
भोपाल मास्टर प्लान को मेट्रोपॉलिटन रीजन की वजह से रोका हुआ है। विभागीय मंत्री खुद कह चुके हैं कि मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना जाहिर होने के बाद मास्टर प्लान बनेगा। ऐसे में यदि मेट्रोपोलिटन रीजन की योजना को गंभीरता से नहीं लिया तो मास्टर प्लान पिछड़ता जाएगा। अभी मास्टर प्लान 2047 तय किया जा रहा है। भोपाल का प्लान करीब 21 साल देरी से है।
Published on:
17 Mar 2026 06:58 am
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