इंदिरा सागर बांध की डूब में आए 254 गांवों के विस्थापित पिछले दो दशक से अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत है। सोमवार को एक बार फिर इंदिरा सागर बांध के विस्थापित पीडि़तों ने मोर्चा खोला। एनएचडीसी कार्यालय के सामने डूब प्रभावितों ने सोमवार से तीन दिवसीय धरना आंदोलन शुरू किया। बारिश और धरने की अनुमति ऐन मौके पर मिलने से पहले दिन चंद गांव से ही लोग आ पाए। इस दौरान डूब पीडि़तों ने अपनी व्यथा मंच से बताई।
सोमवार को डूब प्रभावितों का आंदोलन दोपहर डेढ़ बजे से शुरू हुआ। पहले दिन जन आंदोलन की कमान अधिवक्ता डॉ. डीएल बाकोरिया ने संभाली। डॉ. बाकोरिया ने बताया कि हम लगातार संघर्षरत है, लेकिन एनएचडीसी और प्रशासन के कानों तक आवाज ही नहीं पहुंच रही है। 254 गांवों के लेागों को उजाडकऱ एनएचडीसी अरबो रुपए बिजली, पानी से कमा रही है। नर्मदा पर इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर और सरदार सरोवर बांध बने है। एक ही नदी पर बने दो बांधों के विस्थापितों को पूरा मुआवजा दिया और तीसरे के विस्थापितों को अनाथ छोड़ दिया गया। डॉ. बाकोरिया ने बताया कि शनिवार रात को धरने की अनुमति प्रशासन ने दी, जबकि 15 दिन पूर्व ही आवेदन दे चुके थे। धरने के दूसरे दिन कई गांवों से लोग आएंगे।
ये है विस्थापितों की मुख्य मांग
-एनएचडीसी कार्यालय को खंडवा में यथावत रखने
-एनएचडीसी की लापरवाही के कारण चल रहे हजारों प्रकरणों का शीघ्र निराकरण किए जाए।
-उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में प्रचलित है उन समस्त अपीलों को बिना शर्त वापस लेकर विस्थापितों को भुगतान किया जाएगा।
-सरदार सरोवर और ओंकारेश्वर परियोजना की तरह इंदिरा सागर परियोजना के विस्थापितों को स्पेशल पैकेज दिया जाए।
-नया हरसूद में व्यावसायिक भूखंडों का मालिकाना हक देने, आवंटित आवासीय भूखंडों में उबड़ खाबड़ भूखंडों का समतलीकरण कर दिया जाए।
-डूब पीडि़तों की प्रमुख मांग धारा 28-ए भू अर्जन अधिनियम के अंतर्गत हजारों प्रकरणों का निराकरण किया जाए।
-जो विस्थापित स्टांप ड्यूटी छूट से वंचित है उन्हें छूट का लाभ दिया जाए।
-नए हरसूद के विस्थापितों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया जाए।
-इंदिरा सागर बांध के विस्थापितों को लागत मूल्य पर बिजली दी जाए।
-इंदिरा सागर बांध के अंतर्गत विस्थापितों को ही मछली पालन एवं मछली पकडऩे के लिए विस्थापितों की स्थानीय समितियां को ही रोजगार दिया जाए।
-सामाजिक दायित्व मद (सीएसआर) की राशि विस्थापितों के हित में और बेहतर पुनर्वास के लिए खर्च की जाए।