
सरकारी प्राथमिक विद्यालय में संचालित पूर्व-प्राथमिक कक्षा में अध्ययन करते नन्हे विद्यार्थी। सांदर्भिक फोटो
हुब्बल्ली. सरकारी स्कूलों में घटती नामांकन दर को सुधारने के उद्देश्य से राज्य सरकार पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 के बजट में राज्य के 10 हजार सरकारी स्कूलों में एलकेजी और यूकेजी कक्षाएं शुरू करने की घोषणा होने की संभावना है।
2018-19 से 2024-25 के बीच राज्य के 2,619 सरकारी स्कूलों में एलकेजी-यूकेजी कक्षाएं शुरू की जा चुकी हैं। हालांकि, कर्नाटक राज्य प्राथमिक विद्यालय शिक्षक संघ ने इस वर्ष ही 25 हजार स्कूलों तक विस्तार की मांग की है।
प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना और समग्र शिक्षा कर्नाटक के तहत बच्चों को मध्यान्ह भोजन, दूध और अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है। अभिभावकों से इन योजनाओं को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधारभूत सुविधाएं बेहतर हों तो नामांकन में उल्लेखनीय सुधार होगा।
2025-26 के बजट में 5 हजार प्राथमिक स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक कक्षाएं शुरू करने की घोषणा की गई थी। इसके तहत 4,056 स्कूलों में एलकेजी-यूकेजी आरंभ करने के आदेश जारी हुए हैं। अब सरकार इसे और बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी कर रही है।
कक्षा 1 से 3 तक चल रही ‘नली-कली’ योजना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में एलकेजी-यूकेजी शुरू करने से बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत होगी।
संघ अध्यक्ष चंद्रशेखर नुग्गली ने कहा कि पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के लिए नियुक्त सहायकों और शिक्षकों को नियमित करने की दिशा में भी सरकार को कदम उठाने चाहिए।
स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सुरलकर विकास किशोर ने बताया कि आवश्यक तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं और सरकार के निर्देशानुसार निर्णय लिया जाएगा।
अभिभावकों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में एलकेजी-यूकेजी शुरू होने से निजी स्कूलों पर निर्भरता कम होगी और शुल्क का बोझ घटेगा।
41,279 - राज्य में कुल सरकारी प्राथमिक विद्यालय
19,603 - कनिष्ठ प्राथमिक
21,676 - वरिष्ठ प्राथमिक
2,619 - पिछले पांच वर्षों में नर्सरी कक्षाएं शुरू
10,000 - अगले वर्ष एलकेजी-यूकेजी शुरू होने की संभावना
Published on:
16 Feb 2026 09:27 pm
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