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पूजा करते वक्त भक्त और भगवान का मुख इन दिशाओं में होना चाहिए

ईष्ट देव की पूजा करते समय इस दिशा में रखें साधक अपना मुख

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Shyam Kishor

Jul 17, 2018

puja ghar ki disha

पूजा करते वक्त भक्त और भगवान का मुख इन दिशाओं में होना चाहिए

हिन्दू धर्म में हर व्यक्ति अपने आराध्य देवी देवताओं की पूजा उपासना करते ही हैं, सामान्यत: उपासक पूर्व दिशा में ही मुख करके पूजा करता हैं, जो कि श्रेष्ठ मानी जाती है । इसमें देव प्रतिमाओं का मुख पश्चिम दिशा की ओर होता है, इस प्रकार की गई उपासना हमारे भीतर ज्ञान, क्षमता, सामर्थ्य और योग्यता प्रकट करती है, जिससे हम अपने लक्ष्य की तलाश करके उसे आसानी से हासिल कर लेते हैं । पर विशिष्ट उपासनाओं में पश्चिमाभिमुख रहकर पूजन करने का वर्णन भी मिलता है । इसमें भक्त का मुख पश्चिम की ओर और भगवान का मुख पूर्व दिशा की ओर होता हैं । अगर कोई कहीं भी किसी भी स्थान और दिशा में भक्ति-भाव से पूजा पाठ करता हैं तो वह सफल होती ही है ।

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पूर्व-उत्तर में पूजा का स्थान सर्वोत्तम होता है, इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, प्रसन्नता और स्वास्थ का लाभ मिलता हैं । उन्नति के लिए उत्तरभिमुख होकर भी उपासना करना एवं दक्षिण दिशा सिर्फ षट्कर्मों के लिए इस्तेमाल की जाती है ।

कर्मकांड, तंत्र और वास्तु ये सब अलग-अलग विधाएं हैं, इन्हें मिला देने से कभी-कभी विपरीत फल भी प्राप्त हो सकते हैं ।

1- सीढ़ियों या रसोई घर के नीचे, शौचालय के ऊपर या नीचे कभी भी पूजा का स्थान नहीं बनाना चाहिए ।
2- तंत्र शास्त्र और कर्मकांड में लक्ष्मी की विशिष्ट साधना के लिए पश्चिमाभिमुख होकर बैठना चाहिए ।
3- वास्तु में पश्चिम की तरफ पीठ करके यानी पूर्वाभिमुख होकर बैठना ज्ञान प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है ।


4- उत्तर-पूर्व के कोण को ईशान कोण माना गया है, ईशान कोण देवताओं का स्थान माना जाता है, यहां स्वयं भगवान शिव का भी वास होता है । देव गुरु बृहस्पति और केतु की दिशा भी ईशान कोण ही मानी जाती है । यही कारण है कि यह कोण पूजा-पाठ या अध्यात्म के लिए सबसे उत्तम माना जाता हैं ।
5- पूजा स्थल पर बीच में श्री गणेश की तस्वीर या मूर्ति जरूर होनी चाहिए, मूर्तियां छोटी और कम वजनी अधिक शुभ मानी जाती है ।


6- भगवान जी का चेहरा कभी भी ढकना नहीं चाहिए, यहां तक कि फूल-माला से भी चेहरा नहीं ढकना चाहिए ।

7- भगवान का मुंह दक्षिण मुखी कभी नहीं होना चाहिए । पूरब, पश्चिम और उत्तर मुखी हो सकते हैं । पूजा करने वाले का भी पूरब-पश्चिम की ओर ही मुंह होना चाहिए । पूजा घर में कोई अन्य सामान नहीं रखना चाहिए।


अगर आप अपने घर में सही स्थान और सही दिशा में पूजा स्थल बनवाकर सही तरीके से पूजा करते हों तो निश्चित रूप से वहां से साकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा । जो आपको स्वास्थ तो रखेगा ही सुखी और सामर्थ्यवान भी बनाएगा ।