
Purnima : What to do on this friday and saturday
26 फरवरी 2021 यानि शुक्रवार को दोपहर 03:49 बजे से पूर्णिमा तिथि लग जाएगी, जो 27 फरवरी 2021,शनिवार को दोपहर 01:46 बजे तक रहेगी, इसके बाद प्रतिपदा शुरु हो जाएगी। वहीं माघ पूर्णिमा तिथि 27 फरवरी को ही मान्य रहेगी।
दरअसल पूर्णिमा, पंचांग के अनुसार मास की 15वीं और शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि है जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। हर माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अथवा व्रत अवश्य मनाया जाता हैं।
माघ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2021 Shubh Muhurat)...
माघ पूर्णिमा शनिवार, फरवरी 27, 2021 को
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - फरवरी 26, 2021 को 03:49 PM बजे से
पूर्णिमा तिथि समाप्त - फरवरी 27, 2021 को 01:46 PM बजे तक
जानें पूर्णिमा पर क्या करेंं व क्या न करें...
भोजन : इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे मांस, मटन, चिकन या मसालेदार भोजन, लहसुन, प्याज आदि।
शराब : इस दिन किसी भी हालत में आप शराब ना पिएं क्योंकि इस दिन शराब का दिमाग पर बहुत गहरा असर होता है। इससे शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
क्रोध : इस दिन क्रोध नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है। एक बार नहीं, प्रत्येक पूर्णिमा को ऐसा होता रहता है तो व्यक्ति का भविष्य भी उसी अनुसार बनता और बिगड़ता रहता है।
भावना : जिन्हें मंदाग्नि रोग होता है या जिनके पेट में चय-उपचय की क्रिया शिथिल होती है, तब अक्सर सुनने में आता है कि ऐसे व्यक्ति भोजन करने के बाद नशा जैसा महसूस करते हैं और नशे में न्यूरॉन सेल्स शिथिल हो जाते हैं जिससे दिमाग का नियंत्रण शरीर पर कम, भावनाओं पर ज्यादा केंद्रित हो जाता है। अत: भावनाओं में बहें नहीं खुद पर नियंत्रण रखकर व्रत करें।
स्वच्छ जल : चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं। अत: इस दिन जल की मात्रा और उसकी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
अन्य सावधानियां : इस दिन पूर्ण रूप से जल और फल ग्रहण करके उपवास रखें। यदि इस दिन उपवास नहीं रख रहे हैं तो इस दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें तो ज्यादा बेहतर होगा। इस दिन काले रंग का प्रयोग न करें।
पूर्णिमा का धार्मिक महत्व...
पुराणों के अनुसार माघ पूर्णिमा के दिन देवी-देवताओं ने मानव रूप धारण कर गंगा में स्नान किया था। इस दिन घर में सत्यनारायण जी की कथा करना शुभ माना जाता है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूर्ण दिखाई देता है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से सभी प्रकार के पाप कट जाते हैं।
: यदि कोई व्यक्ति किसी पवित्र नदी के पास नहीं जा सकता तो वह अपने नहाने के पानी में गंगाजल डालकर नहा सकता है। इससे भी स्नान का पूर्ण फल प्राप्त होगा। इस दिन पितरों का तर्पण करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
: पूर्णिमा के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन आप चाहें तो सत्यनारायण की कथा भी कर सकते हैं।
: इस दिन स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण अवश्य करें और पूरे दिन का उपवास रखें।
: इस दिन सूर्योदय से उपवास रख चंद्र दर्शन के बाद समाप्त किया जाता है।
: पूर्णिमा के दिन दान का भी विशेष महत्व है। इसलिए अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान अवश्य दें।
: माघ मास की पूर्णिमा को माघ पूर्णिमा कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 27 नक्षत्रों में एक मघा से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति हुई है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक माघ पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगाजल में वास करते हैं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का खास महत्व है। इस बार माघ पूर्णिमा 27 फरवरी को है। प्रयागराज में एक महीने तक चलने वाला कल्पवास का समापन भी माघ पूर्णिमा के दिन ही होता है।
: माघ पूर्णिमा पर सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु की पूजा के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें। इसके बाद जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े, कंबल, तिल, गुड़, घी, फल और अन्न आदि दान करें। इस दिन सोने और चांदी का भी दान शुभ माना गया है। इसके अलावा इस दिन गौ (गाय) दान करने से विशेष लाभ मिलता है। माघ पूर्णिमा पर व्रत रखना शुभ फलदायक माना गया है। अगर संभव ना हो तो संध्या फलाहार किया जा सकता है। व्रत के दौरान किसी पर गुस्सा करना शुभ नहीं माना गया है। इसके अलावा घरेलू कलह से भी बचना चाहिए। इस तरह माघ पूर्णिमा के व्रत को संयम से रखा जाए तो पुण्य फल प्राप्त होता है।
ऐसे समझें : पूर्णिमा के पर्व...
: चैत्र की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है।
: चैत्र की पूर्णिमा के दिनप्रेम पूर्णिमा पति व्रतमनाया जाता है।
: वैशाख की पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है।
: ज्येष्ठ की पूर्णिमा के दिन वट सावित्री मनाया जाता है।
: आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू-पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। इसी दिन कबीर जयंती मनाई जाती है।
: श्रावण की पूर्णिमा के दिन रक्षाबन्धन का पर्व मनाया जाता है।
: भाद्रपद की पूर्णिमा के दिन उमा माहेश्वर व्रत मनाया जाता है।
: अश्विन की पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।
: कार्तिक की पूर्णिमा के दिन पुष्कर मेला और गुरुनानक जयंती पर्व मनाए जाते हैं।
: मार्गशीर्ष की पूर्णिमा के दिन श्री दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है।
: पौष की पूर्णिमा के दिन शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। जैन धर्म के मानने वाले पुष्यभिषेक यात्रा प्रारंभ करते हैं। बनारस में दशाश्वमेध तथा प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर स्नान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
: माघ की पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती, श्री ललित और श्री भैरव जयंती मनाई जाती है। माघी पूर्णिमा के दिन संगम पर माघ-मेले में जाने और स्नान करने का विशेष महत्व है।
: फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन होली का पर्व मनाया जाता है।
Published on:
26 Feb 2021, 12:29 AM IST
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