वैज्ञानिकों के अनुसार, सिगरेट का धुआं खून की नलियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे दिमाग को ऑक्सीजन कम मिलती है। साथ ही यह सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव पैदा करता है, जो दिमागी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान छोड़ने के बाद ये नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, जिससे याददाश्त और भाषा से जुड़ी मानसिक प्रणालियाँ फिर से स्थिर होने लगती हैं। पहले के अध्ययनों में भी अल्पकालिक सुधार दिखे थे, पर यह नया शोध बताता है कि लाभ कई वर्षों तक बने रहते हैं, भले ही व्यक्ति ने मध्यम या अधिक उम्र में धूम्रपान छोड़ा हो।