
बोथू गांव में होम स्टे पर्यटकों के लिए तैयार है।
खरगोन. चटक रंगों के मांडने। गोबर के लीपन से दमकती दीवारें। सजी-धजी बैलगाडिय़ां और निमाड़ी व्यंजनों की महक। जी हां! नए साल को सेलिबे्रट करने के लिए जिले के होम स्टे वाले गांव बोथू में कुछ इसी तरह की तैयारियां देशी-विदेशी पर्यटकों की अगुवाई में की जा रही है। होम स्टेम में आकर नए साल का स्वागत करने वालों की उत्सुकता ऐसी है कि यहां 15 दिसंबर से ही बुकिंग शुरू हो गई है। इक्का-दुक्का तारीखों को छोडकऱ 31 दिसंबर तक के दिन रिजर्व किए गए हैं। नए साल के स्वागत को लेकर की गई इन तैयारियों के बीच होम स्टे संचालक पर्यटकों को निमाड़ी व्यंजन अमाड़ी की भाजी, ज्वार की रोटी के अलावा ताजा दूध की रबड़ी और दूध कड़ी भी खिलाएंगे।
जिले में ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत नावघाटखेड़ी, बोथू और केरियाखेड़ी गांव में 16 होम स्टे बनाने का लक्ष्य रखा था। 11 होम स्टे पूरी तरह तैयार है केरियाखेड़ी के 5 का काम 90 प्रतिशत हो चुका है। जो होम स्टे तैयार हैं वहां अब तक उत्तराखंड, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, यूपी, छत्तीसगढ़ राज्यों के अलावा विदेशी पर्यटक भी दिन गुजार चुके हैं।
जिला पुरातत्व व संस्कृति परिषद के नीरज अमझरे, बकरी छाप विलेज होम स्टे निर्माण परियोजना प्रमुख दीपक दुबे ने बताया समय के साथ कारोबारी पर्यटकों को रिझाने के लिए फाइव स्टार होटलें तैयार कराते हैं, मगर इन होम स्टे की बानगी इससे जुदा है। इन्हें ठेठ निमाड़ी परिवेश को ध्यान में रखकर तैयार किया है। इनमें लकड़ी, कवेलू, मिट्टी का उपयोग किया है।
बोथू होम स्टे संचालक जयपालसिंह ने बताया पर्यटकों के स्वागत की तैयारियां पूरी है। उनकी अगुवाई बैलगाड़ी से करेंगे। होम स्टे पर 60 प्रकार के निमाड़ी व्यंजन परोसे जाएंगे। इस बार शुद्ध और ताजे दूध से बनी रबड़ी और दूध कड़ी भी भोजन में शामिल हैं। नए साल को सेलिब्रेट करने के लिए इस बार होम स्टे सेंटरों पर अलग-अलग दिनों में लगभग 500 से अधिक पर्यटक पहुंचेंगे।
परियोजना प्रमुख दीपक दुबे ने बताया कुछ पर्यटक ऐसे भी आ रहे हैं जो वर्क फॉर्म होम के तहत जॉब करते हैं। ऐसे पर्यटकों को सुविधा देने के लिए बोथू में वाईफाई की सुविधा दी जा रही है। आर्मी के कुछ सदस्यों ने यहां एक माह की बुकिंग का कॉल किया है। संभवत: जनवरी में यह बुकिंग होगी।
-होम स्टे से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा बाहर से आए पर्यटकों को निमाड़ी संस्कृति से जोडऩा इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। शुरुआती दौर में अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। -आकाशसिंह, जिपं सीइओ, खरगोन
Updated on:
29 Dec 2025 03:01 pm
Published on:
25 Dec 2025 09:52 am
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