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झालावाड़ में डेयरी व्यवसाय से किसान-महिलाएं हो रहीं आत्मनिर्भर

झालावाड़ जिले में इस समय प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इस उत्पादन से लगभग 40 हजार दूध उत्पादक किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।

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हरिसिंह गुर्जर

Jhalawar Milk News

झालावाड़. जिले में डेयरी व्यवसाय दूध उत्पादक किसानों को आत्मनिर्भर बना रहा है। झालावाड़ जिले में इस समय प्रतिदिन एक लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इस उत्पादन से लगभग 40 हजार दूध उत्पादक किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। पशुपालन व्यवसाय जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।जिले में एक निजी कंपनी इस क्षेत्र में एक प्रमुख प्रेरक शक्ति के रूप में उभरी है। कंपनी से कुल 11 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से वर्तमान में 55 सौ महिलाएं सक्रिय रूप से प्रतिदिन 25 हजार लीटर दूध का योगदान कर रही हैं। यह आंकड़ा जिले में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं के सशक्तिकरण में डेयरी व्यवसाय के महत्त्व को रेखांकित करता है। स्थानीय किसानों और पशुपालकों ने सरकार से इस क्षेत्र को और बढ़ावा देने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि यदि जिले में पशु नस्ल सुधार कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाए तो दूध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

गोपाल योजना फिर से शुरू करें सरकार-

पशुपालक किसानों का कहना है कि सरकार गोपाल योजना को पुनः शुरू करें, ताकि छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों को आवश्यक सहायता और प्रोत्साहन मिल सके। किसानों ने यह भी अनुरोध किया है कि सरकार पशुपालन व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्हें ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराए। उनका मानना है कि ऐसे कदम न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेंगे बल्कि जिले की समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेंगे। दूध उत्पादन की यह क्षमता स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन में भी अहम योगदान दे रही है।

जिले में दूध उत्पादन: फैक्ट फाइल-

सरस दूध डेयरी- 15 हजार लीटर प्रतिदिन
निजी कंपनियां- 45 हजार लीटर प्रतिदिन

खुला बंदियों पर दूध- 40 हजार लीटर प्रतिदिन
दूध उत्पादन से प्राप्त राशि- 50 लाख रुपए प्रतिदिन

नस्ल सुधार पर काम-

ग्रोथ सेंटर िस्थत एक निजी कंपनी जिले में नस्ल सुधार के लिए अहमदाबाद से भैंस के लिए मुर्रा व गाय के लिए गिर नस्ल का उन्नत सीमन मंगवाकर यहां पशुपालकों को उपलब्ध करवा रही है, ताकि अच्छी नस्ल के पशु किसानों के पास होंगे तो उन्हे दूध उत्पादन से ज्यादा आय होगी। जिले में एक निजी कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में लाभांश का 1 करोड़ 11 लाख रुपए दूध उत्पादन महिलाओं को दिया है।

सभी डेयरी वाले किसानों का शोषण कर रहे हैं। अजमेर डेयरी ने दस रुपए प्रति फेट देना शुरू कर दिया है, झालावाड़ जिले में भी सभी डेयरियों को दस रुपए प्रति फेट के हिसाब से दाम देना चाहिए। निजी डेयरियों की बजाए सरकारी डेयरी पर भी दूध के दाम बढ़ाना चाहिए। आज के समय में दूध उत्पादक किसानों को खल, बांटा बहुत महंगा मिल रहा है। ऐसे में 55-60 रुपए प्रति लीटर में दूध देना उसके लिए संभव नहीं है। दूध के दाम नहीं बढ़ते है तो आगामी दिनों में भारतीय किसान संघ इसके लिए आंदोलन करने को मजबूर होगा।


राधेश्याम गुर्जर, जिलाध्यक्ष भारतीय किसान,संघ, झालावाड़।

जिले में कुल 11 हजार महिलाएं कंपनी से जुडी हुई है, अभी गर्मी होने से 55 सौ महिला उत्पादक किसान प्रतिदिन 25 हजार लीटर दूध डेयरी को उपलब्ध करवा रही है। इसमें महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया जा रहा है। ताकि किसानों को खेती की बजाएं अतिरिक्त आय हो सके।


सीताराम चौधरी, एरिया मैनेजर मिल्ड प्रोड्यूसर कंपनी, झालावाड़।