
शत प्रतिशत अंकों के साथ अंकिता ने किया टॉप
Karnataka School Examination and Evaluation Board ने गुरुवार को SSLC (राज्य बोर्ड 10वीं) की पहली वार्षिक परीक्षा के नतीजे घोषित किए। बीते तीन वर्षों की तुलना में परिणाम खराब रहा। इस बार 73.40 फीसदी विद्यार्थी ही अपनी योग्यता सिद्ध कर सके जबकि गत वर्ष 83.89 विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की थी। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 में उत्तीर्ण प्रतिशत 85.13 था। वहीं शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में परिणाम 99.99 फीसदी था। हालांकि, यह वह समय था जब पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था।
इस बार भी लड़कियों ने बाजी मारी है। 81.11 फीसदी लड़कियों के मुकाबले 65.90 लड़के उत्तीर्ण हुए हैं। इस बार की टॉपर भी एक छात्रा है। बागलकोट जिले के मुधोल स्थित मोरारजी देसाई आवासीय विद्यालय की Ankita Basappa Konnur राज्य की टॉपर रही। अंकिता ने 625 में से 625 अंक ला सभी को पीछे छोड़ दिया। अंकिता के अलावा इस बार किसी को भी शत-प्रतिशत अंक नहीं मिले हैं। 624 अंकों के साथ सात और 623 अंकों के साथ 14 विद्यार्थी दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दूसरे स्थान पर रहे सात में से केवल मेधा पी. शेट्टी बेंगलूरु से है।
74 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र से
ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों ने शहरी क्षेत्र के विद्यार्थियों से बेहतर प्रदर्शन किया है। जहां ग्रामीण क्षेत्र के 74.17 फीसदी विद्यार्थियों ने सफलता दर्ज की है वहीं शहरी क्षेत्रों के 72.83 विद्यार्थी उत्तीर्ण रहे।
गैर अनुदानित स्कूल आगे
गत वर्ष 86.74 फीसदी के मुकाबले इस बार सरकारी स्कूलों का परिणाम 72.46 फीसदी रहा। अनुदानित स्कूलों के 72.22 फीसदी विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। गत वर्ष 85.64 फीसदी विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे। इस बार गैर अनुदानित स्कूलों के नतीजे भी कम आए हैं। गत वर्ष 90.89 फीसदी के मुकाबले इस बार 86.46 फीसदी ही उत्तीर्ण हो सके।
78 स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत शून्य
तीन सरकारी, 13 अनुदानित और 62 गैर अनुदानित यानी कुल 78 स्कूलों का उत्तीर्ण प्रतिशत शून्य रहा। गत वर्ष यह आंकड़ा 34 ही था।
शत प्रतिशत प्रदर्शन वाले स्कूलों की संख्या घटी
इस बार शत प्रतिशत प्रदर्शन वाले स्कूलों की संख्या भी घटी है। गत वर्ष 3823 स्कूलों के मुकाबले इस वर्ष 2288 स्कूलों का प्रदर्शन शत प्रतिशत रहा। 1297 गैर अनुदानित, 206 अनुदानित और 785 सरकारी स्कूलों के सभी बच्चे उत्तीर्ण हुए हैं। गत वर्ष 1517 सरकारी स्कूलों के सभी बच्चे उत्तीर्ण हुए थे।
14वें से पहले पायदान पर पहुंचा उडुपी
इस बार की परीक्षा में 94 फीसदी उत्तीर्ण प्रतिशत के साथ उडुपी जिले ने सभी को पीछे कर दिया। गत वर्ष उडुपी जिला 14वें स्थान पर था। वहीं 50.59 फीसदी उत्तीर्ण प्रतिशत के साथ यादगीर जिला इस बार भी अंतिम पायदान पर रहा।
रैंक के आधार पर शीर्ष 10 जिले
जिला - उत्तीर्ण प्रतिशत
उडुपी - 94
दक्षिण कन्नड़ - 92.12
शिवमोग्गा - 88.67
कोडुगू - 88.67
उत्तर कन्नड़ - 86.54
हासन - 86.28
मैसूरु - 85.5
सिरसी - 84.64
बेंगलूरु ग्रामीण -83.67
चिकमगलूरु - 83.39
वर्ष - उतीर्ण प्रतिशत
2015 - 81.82
2016 - 75.11
2017 - 67.87
2018 - 71.93
2019 - 73.70
2020 - 72.42
2021 - 99.99
2022 - 85.13
2023 - 83.89
2024 - 73.40
मीडियम - उत्तीर्ण प्रतिशत
कन्नड़ - 69.34
अंग्रेजी - 88.29
उर्दू - 63.49
मराठी - 69.32
तेलुगू - 75.59
तमिल - 73.68
हिन्दी - 68.87
61160 शिक्षकों ने किया मूल्यांकन
25 मार्च से छह अप्रेल तक आयोजित इस परीक्षा में 8,59,967 परीक्षार्थी शामिल हुए। 15 अप्रेल से 24 अप्रेल तक प्रदेश भर के 237 मूल्यांकन केंद्रों पर 61,160 मूल्यांकनकर्ताओं ने उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया।
Published on:
10 May 2024 12:49 pm
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