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श्रीमद भगवद गीता वैश्विक स्वीकृति प्राप्त ग्रंथ : राज्यपाल

श्री राम कृष्ण नॉलेज फाउंडेशन-सूरत की ओर से एसआरके इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स और नर्मद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सोशल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में पिछले एक वर्ष से लगातार बावन सप्ताह तक चलने वाली गीता व्याख्यान माला के समापन समारोह को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सम्बोधित किया।

अहमदाबादJun 23, 2024 / 09:18 pm

Pushpendra Rajput

Gujarat governor in surat

राज्यपाल आचार्य देवव्रत सूरत में गीता व्याख्यान माला के समापन समारोह में मौजूद रहे।

श्रीमद भगवद गीता कोई धर्म विशेष, संप्रदाय विशेष या दर्शन विशेष का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्वीकृति प्राप्त विश्व ग्रंथ है। भारतीय संस्कृति और उसकी समृद्ध चिंतन परंपरा ने सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि समस्त विश्व को जीवन-दर्शन से अवगत कराया है। गीता में श्रीकृष्ण-अर्जुन के माध्यम से मनुष्य को श्रेष्ठ जीवन जीने का उपदेश दिया गया है।
श्री राम कृष्ण नॉलेज फाउंडेशन-सूरत की ओर से एसआरके इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स और नर्मद विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सोशल स्टडीज के संयुक्त तत्वावधान में पिछले एक वर्ष से लगातार बावन सप्ताह तक चलने वाली गीता व्याख्यान माला के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने यह बात कही।
राज्यपाल ने कहा कि जीवन की कोई भी ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान गीता में न हो। जीवन में जब हम निराश या हताश हो जाते हैं, तब इस ग्रंथ का अध्ययन हमें नकारात्मकता से बाहर निकालने में सक्षम है। कर्म, भक्ति और ज्ञान का समन्वय एकदम सरल तरीके से यह ग्रंथ हमें समझाता है।
कक्षा 6 से 12 के कोर्स में गीता शामिल

शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुल पानसेरिया ने कहा कि गीता ज्ञान से छात्रों को संस्कारी और सभ्य बनाने के उद्देश्य से नई शिक्षा नीति के तहत राज्य सरकार ने स्कूलों में कक्षा 6 से 12 में श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। गीता के सिद्धांत और मूल्य छात्रों के व्यक्तित्व में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे।
इस अवसर पर सूरत शहर के पूर्व आयुक्त अजय तोमर ने कहा कि गीता छंदबद्ध और काव्यात्मक शैली में रचित ग्रंथ है, इसलिए गीत और गीता एक दूसरे के पूरक बन गए हैं। गीता कंठस्थ नहीं, आत्मस्थ करने का ग्रंथ है।
राज्यसभा सांसद एवं एसआरके फाउंडेशन के ट्रस्टी गोविंदभाई धोलकिया ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मानव मूल्यों, भारतीय संस्कृति और सभ्यता का संवर्धन करती है। व्याख्यानमाला में देश के विभिन्न वक्ताओं ने 55 हजार मिनट का गीता ज्ञान प्रदान किया। विशेष रूप से राज्यपाल की पोती कुमारी वरेण्या ने मधुर स्वर में नीतिशतक और गीता के श्लोकों का गायन कर श्रोताओं को गीता ज्ञान का रस पान कराया।
इस अवसर पर गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भाग्येश झा समेत गीता प्रेमी नागरिक और अतिथि उपस्थित थे।

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