
स्मार्ट पार्किंग, डिजिटल पेमेंट और AI तकनीक से बदलता आधुनिक शहरों का ट्रैफ़िक सिस्टम। (फोटो : AI)
शहरों में पार्किंग की परेशानी से राहत दिलाने वाले ऐप्स अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि शहरी परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। बढ़ती गाड़ियों की संख्या, सीमित पार्किंग स्थान और समय की बढ़ती कीमत ने स्मार्ट पार्किंग तकनीक की जरूरत बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल है कि क्या आने वाले समय में मोबाइल ऐप के जरिए पार्किंग ढूंढना और बुक करना उतना ही आसान होगा, जितना आज कैब या खाना बुक करना है?
भारत में स्मार्ट पार्किंग सिस्टम का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। अलग-अलग बाजार रिपोर्टों में इसके आकार और विकास दर को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्मार्ट पार्किंग सिस्टम का बाजार 2025 में करीब 327.4 मिलियन डॉलर था और 2034 तक इसके 948 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। दूसरी रिपोर्ट में 2025 का बाजार आकार 237.4 मिलियन डॉलर और 2033 तक 1,541.2 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
आंकड़ों में अंतर जरूर है, लेकिन दोनों अनुमान एक बात की ओर संकेत करते हैं कि स्मार्ट पार्किंग तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। सेंसर, कैमरा, मोबाइल ऐप, डिजिटल भुगतान और AI जैसी तकनीकें इस क्षेत्र को नया रूप दे रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में Park+ जैसे प्लेटफॉर्म पार्किंग खोजने और बुक करने की सुविधा देते हैं। ऐप के जरिए पार्किंग की उपलब्धता देखने, बुकिंग करने और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। कई स्थानों पर FASTag आधारित भुगतान जैसी सुविधाएं भी पार्किंग अनुभव को आसान बना रही हैं।
Get My Parking जैसे प्लेटफॉर्म एयरपोर्ट, मॉल और कॉर्पोरेट कैंपस सहित B2B पार्किंग प्रबंधन पर भी काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, विभिन्न शहरों में स्मार्ट पार्किंग के लिए स्थानीय स्तर पर भी डिजिटल समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
मुंबई में BMC की ‘बुक योर पार्किंग स्पॉट’ योजना का उद्देश्य नागरिकों को पार्किंग स्थान पहले से देखने और बुक करने की सुविधा देना है। प्रस्तावित व्यवस्था में सार्वजनिक, निजी और आवासीय पार्किंग को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। हालांकि, परियोजना को टेंडर और क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
बेंगलुरु में कई स्थानों पर ऑन-स्ट्रीट स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था लागू की गई है। इसमें सेंसर और कैमरों की मदद से पार्किंग स्थानों की स्थिति की जानकारी जुटाई जाती है। डिजिटल टिकट और कैशलेस भुगतान जैसी सुविधाएं भी पार्किंग प्रक्रिया को आसान बनाती हैं।
कोच्चि में ParKochi जैसे स्मार्ट पार्किंग समाधान रीयल-टाइम उपलब्धता और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं पर केंद्रित हैं। इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालकों को पार्किंग की तलाश में अनावश्यक समय और ईंधन खर्च करने से बचाना है।
स्मार्ट पार्किंग का अगला चरण केवल खाली जगह दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा। AI, कंप्यूटर विजन और नंबर प्लेट पहचान तकनीक पार्किंग व्यवस्था को ज्यादा स्वचालित बना सकती हैं।
Parkomate ने AI, सेंसर और विजन तकनीक पर आधारित स्मार्ट पार्किंग समाधान पेश किया है। इसमें नंबर प्लेट पहचान, रीयल-टाइम गाइडेंस और क्लाउड आधारित इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इसके पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया गया था।
इसी तरह ParkWise जैसे स्टार्टअप AI आधारित पीयर-टू-पीयर पार्किंग मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य खाली निजी पार्किंग स्थानों को जरूरतमंद वाहन चालकों से जोड़ना है। भविष्य में ऐसे प्लेटफॉर्म EV चार्जिंग जैसी सुविधाओं को भी पार्किंग नेटवर्क से जोड़ सकते हैं।
भविष्य की स्मार्ट पार्किंग केवल वाहन खड़ा करने की जगह नहीं होगी। EV की बढ़ती संख्या के साथ पार्किंग स्थानों पर चार्जिंग सुविधा भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
नई स्मार्ट पार्किंग परियोजनाओं में EV चार्जिंग, मोबाइल ऐप, डिजिटल भुगतान और रीयल-टाइम निगरानी को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पार्किंग स्थल भविष्य में छोटे मोबिलिटी हब की तरह काम कर सकते हैं।
बड़े शहरों में स्मार्ट पार्किंग की शुरुआत तेजी से हो रही है, लेकिन छोटे और मध्यम शहरों में तस्वीर अलग है। यहां पर्याप्त तकनीकी निवेश, डेटा प्रबंधन, पार्किंग नीति और सेवा प्रदाताओं की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
शहरी विशेषज्ञों की रिपोर्टों में भी पार्किंग की कमी, अनियोजित पार्किंग और ट्रैफिक जाम को एक-दूसरे से जुड़ी समस्याओं के रूप में देखा गया है। छोटे शहरों में कारों की संख्या बढ़ने के साथ यह चुनौती और गंभीर हो सकती है।
सिर्फ ऐप लॉन्च करना समस्या का समाधान नहीं है। स्मार्ट पार्किंग के लिए स्पष्ट पार्किंग नीति, पर्याप्त पार्किंग स्थान, डिजिटल बुनियादी ढांचा और नगर निकायों की सक्रिय भूमिका भी जरूरी होगी।
दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और कोच्चि जैसे बड़े शहरों में स्मार्ट पार्किंग सेवाओं का विस्तार दिखाई दे रहा है। आने वाले वर्षों में AI आधारित गाइडेंस, रीयल-टाइम पार्किंग डेटा, डिजिटल भुगतान और EV चार्जिंग जैसी सुविधाएं इस व्यवस्था को और उपयोगी बना सकती हैं।
हालांकि, किसी शहर को पूरी तरह ‘पार्किंग टेंशन-फ्री’ बनाने के लिए केवल ऐप पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए बेहतर शहरी नियोजन, पर्याप्त पार्किंग क्षमता और प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन भी जरूरी है।
बहरहाल,भविष्य में पार्किंग ऐप वाहन चालक को सिर्फ यह नहीं बताएगा कि जगह कहां खाली है, बल्कि यह भी बता सकता है कि वहां पहुंचने में कितना समय लगेगा, पार्किंग की कीमत क्या है, EV चार्जिंग उपलब्ध है या नहीं और किस स्थान पर जाना सबसे सुविधाजनक रहेगा। यानी स्मार्ट पार्किंग का भविष्य ऐप से आगे बढ़कर एकीकृत शहरी मोबिलिटी सिस्टम बनने की दिशा में है।
Updated on:
19 Aug 2026 02:39 pm
Published on:
19 Aug 2026 12:34 pm
