
केरल में मुल्लापेरियार और इडुक्की बांधों से जुड़े बाढ़ के जोखिम का विश्लेषण करने और खतरे से निपटने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मदद करेगा। अत्यंत विपरीत मौसम के चलते पैदा हुए बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए इसरो उन क्षेत्रों की भी पहचान करेगा जो सुरक्षित और पुनर्वास के लिए उपयुक्त हैं। इसरो अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने यहां बुधवार को अंतरिक्ष भवन में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी से मुलाकात के दौरान कही।
केरल में आने वाले विनाशकारी बाढ़ पर जताई चिंता
केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इसरो अध्यक्ष से मुलाकात के दौरान केरल में आने वाले विनाशकारी बाढ़ का मुद्दा उठाया और उनसे अंतरिक्ष तकनीक के जरिए मदद की अपील की। हर साल बाढ़ से होने वाले नुकसान के प्रति चिंता जताते हुए गोपी ने कहा कि, मुल्लापेरियार और इडुक्की बांधों से उत्पन्न होने वाले अत्यंत बुरे हालात का मूल्यांकन करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने बांधों में गाद की मात्रा और उसके स्वरूप के बारे में अध्ययन करने की बात भी कही।
उच्च-रिजॉल्यूशन वाले भू-भागीय आंकड़े उपलब्ध कराएगा इसरो
इसरो अध्यक्ष सोमनाथ ने कहा कि, बाढ़ का आकलन करने तथा संभावित पुनर्वास क्षेत्रों की पहचान करने के लिए बाढ़ मॉडलिंग में लगे शोधकर्ताओं को उच्च-रिजॉल्यूशन वाले भू-भागीय आंकड़े उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने बाढ़ के जोखिम के साथ राहत एवं बचाव तथा पुनर्वास योजना को एकीकृत करने तथा उपग्रह संचार क्षमताओं के साथ एक प्रोटोटाइप समाधान विकसित करने का भी सुझाव दिया। आपदा प्रबंधन के लिए अंतरिक्ष आधारित तकनीक का उपयोग करते हुए क्षमता निर्माण की भी बात इसरो अध्यक्ष ने कही।
इस दौरान पेरियार नदी बेसिन में बाढ़ जोखिम मॉडलिंग पर शोधरत कोच्चि के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राधानाध्यापक ने एक प्रस्तुती दी। उन्होंने कहा कि, समुचित अध्ययन के लिए सार्वजनिक रूप से आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, हैदराबाद स्थित इसरो की इकाई एनआरएससी के निदेशक डॉ प्रकाश चौहान ने भी केंद्र द्वारा विकसित बाढ़ प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के बारे में जानकारी दी।
Published on:
19 Jun 2024 07:51 pm
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