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सरिस्का की अकबरपुर रेंज का सर्वे पूरा…67 होटल राजस्व बफर में आए…सीटीएच से एक किमी है दूरी

सरिस्का की अकबरपुर रेंज का सर्वे भी लगभग पूरा हो गया। इस रेंज में 67 होटल-रेस्टोरेंट ऐसे मिले हैं जो राजस्व बफर की जमीन पर चले रहे हैं। क्रिटिकल टाइगर हैबीटेट से इनकी दूरी एक किमी के दायरे में बताई जा रही है।

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अलवर

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susheel kumar

Jul 22, 2024

alwar ke sariska century ka board

- यह होटल मालाखेड़ा के अलावा सतावरी, धर्मपुरा, गोपालपुरा, कालीखोल आदि इलाकों में बने हुए

- अधिकांश प्रतिष्ठान सीटीएच से एक किमी के दायरे में, ऐसे में कार्रवाई होना तय

सरिस्का की अकबरपुर रेंज का सर्वे भी लगभग पूरा हो गया। इस रेंज में 67 होटल-रेस्टोरेंट ऐसे मिले हैं जो राजस्व बफर की जमीन पर चले रहे हैं। क्रिटिकल टाइगर हैबीटेट से इनकी दूरी एक किमी के दायरे में बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट व सरकार के आदेश के मुताबिक, यह होटल संचालित नहीं हो पाएंगे। हालांकि इससे पहले प्रशासन व वन विभाग इन्हें नोटिस जारी करेगा।

इस तरह बाहर आए होटल

अकबरपुर रेंज में उपखंड अलवर व मालाखेड़ा का हिस्सा लगता है। उपखंड अलवर में सिलीसेढ़ के अलावा सतावरी, धर्मपुरा, गोपालपुरा, काली खोल आदि एरिया आते हैं। इनमें 40 होटल-रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट ऐसे मिले हैं जो राजस्व बफर पर बने हुए हैं। दो ही होटलों की जमीन का भू उपयोग बदला हुआ है। बाकी कृषि भूमि पर ही चल रहे हैं। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनुमति किसी के पास नहीं है। वहीं, मालाखेड़ा क्षेत्र में 27 होटल राजस्व बफर की जमीन पर मिले हैं। इनकी दूरी भी सरिस्का सीटीएच से एक किमी के दायरे में है। मालाखेड़ा का सर्वे तो पूरा हो गया लेकिन अधिकारियों के हाथों में रिपोर्ट नहीं पहुंची। एक अधिकारी का कहना है कि फॉर्मेट बदलने के कारण दोबारा सूची तैयार हो रही है। एक-दो दिन में अधिकारियों तक पहुंचेगी। मालूम हो कि सिलीसेढ़ में बफर एरिया में 14 होटल बने हुए हैं। इन पर भी कार्रवाई होनी है।

यूआईटी ने क्यों नहीं तोड़े अवैध निर्माण

कृषि भूमि पर 67 होटल खड़े हो गए लेकिन यूआईटी ने किसी पर कार्रवाई नहीं की। कॉमर्शियल गतिविधियां जारी हैं। इससे यूआईटी के कार्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। यानी पूरा संरक्षण होटल-रेस्टोरेंट बनाने के लिए मिला। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इन्हें नहीं रोका। वन विभाग ने राजस्व बफर होने के कारण नोटिस भी नहीं दिए।

टहला में क्या चल रहा है खेल

सरिस्का का टहला एरिया होटल-रेस्टोरेंट से पटा हुआ है। वन विभाग के पूर्व व वर्तमान अधिकारियों के होटल-रेस्टारेंट यहां चल रहे हैं। इस एरिया का सर्वे एसडीएम राजगढ़ सीमा खेतान नहीं करवा पाई, जबकि एक माह से ज्यादा समय हो गया। सर्वे के नाम पर अफसर सरिस्का की हरियाली आदि का लुत्फ उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सरिस्का सीटीएच से एक किमी के दायरे में यहां सर्वाधिक होटल हैं। उन्हीं की दूरी का सही पता सरिस्का प्रशासन को सर्वे के जरिए लगाना है। इसी में ढील हो रही है। सभी जगह की रिपोर्ट आ गई, लेकिन टहला में खेल चल रहा है। तमाम आरोप भी लगाए जा रहे हैं। एसडीएम व तहसीलदार टहला से संपर्क किया गया लेकिन फोन नहीं उठाया।

इन नियमों में होनी है कार्रवाई

- सर्वोच्य न्यायालय ने 20 अप्रेल 2023 को आदेश दिए थे कि राष्ट्रीय उद्यान / वन्यजीव अभ्यारण्य/रक्षित वन क्षेत्र की सीमा से 1 किलोमीटर या ईएसजेड, जो भी अधिक हो तक खनन कार्य और प्रतिबन्धित श्रेणी की व्यवसायिक / औद्योगिक गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। जिन राष्ट्रीय उद्यान/वन्यजीव अभ्यारण्य में ईएसजेड नहीं बना है, वहां सेंचुरी लाइन से 10 किलोमीटर तक यह गतिविधियां न हों।

- पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 6 मई 2022 के आदेश भी सरकार ने पत्र में दिए हैं। मंत्रालय के अनुसार, रक्षित क्षेत्र, वन्यजीव अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, बाघ रिजर्व एवं लिंकिंग एरिया में गतिविधियों के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत स्वीकृति के लिए गाइड लाइन जारी की गई हैं। ऐसे में अधिकारी इसका पालन करें।

- पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 30 दिसम्बर 2019 में जारी किए आदेश में कहा था कि बाघ रिजर्व (कोर/बफर), कॉरिडोर / लिंकिंग एरिया में आधारभूत विकास परियोजनाओं की स्वीकृति वन विभाग के अलावा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से ली जाए।

- वन विभाग राजस्थान सरकार ने 31 मार्च 2015 को सरिस्का व रणथंभोर बाघ परियोजना, जवाई लेपर्ड संरक्षण रिजर्व एवं कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य के चारों ओर निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आदेश जारी किए थे। रणथम्भोर, सरिस्का सीटीएच व जवाई लेपर्ड संरक्षण रिजर्व एवं कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की अधिसूचित सीमा की एक किलोमीटर की परिधि में व्यावसायिक (होटल सहित) एवं औद्योगिक (खनन सहित) गतिविधियों को प्रतिबंधित किया था। संबंधित राजस्व/नगरीय निकाय प्राधिकारी की ओर से एक किलोमीटर की सीमा तक भू-सम्परिवर्तन पर भी रोक लगाई थी।