
दमोह. दशकों बाद भी दमोह शहर व्यवस्थित नहीं हो पाया है। फुटपाथ और शहर की नालियां अतिक्रमण की चपेट में हैं। इन जगहों पर टपरों ने कब्जा कर लिया है। जानकर हैरानी होगी कि शहर में जितनी पक्की दुकानें नहीं बनी हैं। उससे कहीं ज्यादा शहर की सड़कों टपरे रखे हुए हैं। शहर को गंभीरता से देखें तो शहर टपरा सिटी की तरह दिखाई देने लगा है। शहर का कोई भी इलाका ऐसा नहीं है, जहां टपरे न रखे हों। सवाल यह है कि सरकारी जमीनों पर टपरों को रखने की अनुमति कैसे मिल रही है। सूत्र बताते हैं कि नगर पालिका के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा हो रहा है। बता दें कि समय समय पर नगर पालिका और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से फुटपाथों और नालों पर रखे इन पान के टपरों को हटाने की कार्रवाई करती है, लेकिन कुछ दिन बाद वापस टपरे रख जाते हैं।
-फैंसिंग कराई तो नहीं वापस हुआ अतिक्रमण
जबलपुर नाका क्षेत्र में एक महीने पहले ३०० से अधिक टपरों को हटाया गया था। जिला प्रशासन ने उक्त कार्रवाई की थी। हालांकि इस दफा टपरे हटाने के साथ-साथ तार फैंसिंग कराई गई। इस वजह से दोबारा टपरे नहीं रख पाए हैं। कलेक्ट्रेट कार्यालय से मारूताल मार्ग अब साफ नजर आता है।
-शहर में भी इस तरह की कार्रवाई की दरकार
कुछ यही कार्रवाई शहर के भीतर भी होना चाहिए। ताकि शहर सुंदर दिखे और फुटपाथ, नाले और अन्य सरकारी जमीन कब्जा मुक्त रहे। वर्तमान में शहर का कोई भी चौराहा और बाजार व्यवस्थित नजर नहीं आता है। जगह-जगह रखे यह टपरे शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहे हैं। वहीं, जहां-जहां यह टपरे रखे हुए हैं। उन जगहों पर जाम की थी स्थिति बन रही है।
-इन इलाकों पर है सबसे अधिक टपरे
शहर में अस्पताल चौराहा, बैंक चौराहा, कीर्ति स्तंभ से कलेक्ट्रेट कार्यालय, कलेक्ट्रेट कार्यालय से किल्लाई नाका, किल्लाई नाके से बस स्टैँड, रेलवे स्टेशन से तीन गुल्ली। राय चौराहे से घंटाघर आदि इलाकों में टपरे ही टपरे देखे जा सकते हैं।
वर्शन
मैं अभी बाहर हूं। नगर पालिका सीएमओ को बोलकर सर्वे करवाता हूं। अवैध टपरे हटाए जाएंगे।
सुधीर कुमार कोचर, कलेक्टर दमोह
Published on:
09 Jun 2025 11:52 am
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