
Supreme Court of India
सुप्रीम कोर्टः रेवंत रेड्डी को गलती न दोहराने की चेतावनी
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को राज्य विधानसभा में दिए गए उनके बयान पर फटकार लगाते हुए कहा कि वे दलबदल विरोधी कानून का मजाक उड़ा रहे हैं। पिछले महीने विधानसभा में बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने कांग्रेस में शामिल हुए भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायकों से कहा था कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि उपचुनाव नहीं होंगे।
बीआरएस नेताओं द्वारा पिछले साल कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने मुख्यमंत्री को फटकार लगाते हुए कहा, 'सदन में ऐसा कहा जाना मुख्यमंत्री द्वारा 10वीं अनुसूची का मजाक उड़ाना है।'
बुधवार को याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील सी. आर्यमन सुंदरम 26 मार्च को विधानसभा में दिए गए सीएम के बयान को अदालत के संज्ञान में लाए। प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नगत नहीं है। पीठ ने कहा कि विधानसभा में दिए गए बयानों की पवित्रता होती है। जस्टिस गवई ने रोहतगी से कहा कि वे मुख्यमंत्री को चेतावनी दें कि ऐसी गलती न दोहराएं। जाहिर तौर पर पीठ उस टिप्पणी का जिक्र कर रही थी जो दिल्ली शराब नीति मामले में बीआरएस एमएलसी के. कविता को दी गई जमानत को लेकर पिछले साल अगस्त में सीएम रेड्डी ने की थी। रेड्डी ने कथित तौर पर कहा था कि पांच महीने के भीतर कविता को जमानत हासिल हो सकती हैं क्योंकि बीआरएस का वोट बैंक भाजपा को हस्तांतरित हो गया है। तब सुप्रीम कोर्ट के सीएम रेड्डी को उनकी टिप्पणी के लिए दोषी ठहराने पर रेड्डी ने बिना शर्त खेद व्यक्त किया था।
Updated on:
06 Apr 2025 12:14 am
Published on:
06 Apr 2025 12:14 am
