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89 हजार वर्षों में 164 फीट बढ़ गई माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई, हर वर्ष दो मिलीमीटर उठा

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8849 मीटर) को लेकर नई थ्योरी सामने आई है।

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लंदन. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8849 मीटर) को लेकर नई थ्योरी सामने आई है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने बताया कि पिछले 89 हजार वर्षों में इसकी ऊंचाई 15 से 50 मीटर (49-164 फीट) तक बढ़ चुकी है। जीपीएस उपकरणों से पता चला है कि यह हर वर्ष 2 मिमी की दर से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने नेचर जियोसाइंस में लिखा कि इसकी ऊंचाई का बढऩा पास की नदी की गतिविधियों पर निर्भर करता है। सह लेखक डॉ. जिन जेन दाई कहते हैं कि एवरेस्ट क्षेत्र में एक दिलचस्प नदी प्रणाली काम करती है। हिमालय के पश्चिमी हिस्से में अरुण नदी नीचे की ओर बढ़ती है। इसके बाद यह कोसी नदी के रूप में अचानक दक्षिण की ओर मुड़ जाती है और तेज प्रवाह से बहने लगती है। डॉ. दाई और उनके सहयोगियों ने पाया कि ये दो नदियां अरुण और कोसी लगभग 89 हजार वर्ष पहले आपस में मिल गई थीं। संकीर्ण रास्तों के कारण का कटाव तेजी से हुआ और एवरेस्ट के आसपास के हिस्सों की अरबों टन चट्टान और तलछट यहां से कम हो गई, जिससे यह हल्की हो गई और पृथ्वी की सबसे ऊपर की परत क्रस्ट उसके नीचे की अद्र्ध तरल परत को ऊपर धकेलती है।

आइसोस्टेटिक रिबाउंड
वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को ‘आइसोस्टेटिक रिबाउंड’ कहते हैं। यानी कोई पदार्थ जितना हल्का या कम सघन होता है, वह पानी में या मेंटल पर उतना ही ऊपर तैरता है। यह सिद्धांत एवरेस्ट के ऊपर उठने पर लागू होता है। एक अन्य शोधकर्ता डॉ. एडम स्मिथ कहते हैं आप माउंट एवरेस्ट के आसपास के क्षेत्र को पानी की सतह पर रखे एक पूल फ्लोट की तरह सोच सकते हैं। यदि आप फ्लोट पर भार डालते हैं तो गुरुत्वाकर्षण बल पानी के ऊपर की ओर धकेलने वाले बल से अधिक मजबूत हेागा और फ्लोट पानी में नीचे बैठ जाएगा। लेकिन यदि आप धीरे-धीरे उनमें से कुछ भार हटा लेंगे तो फ्लोट धीरे-धीरे ऊपर उठ जाएगा। एवरेस्ट के साथ भी ऐसा ही हुआ है, क्योंकि एवरेस्ट के निकट की अरबों टन सामग्री को हटा दिया गया है, जिससे उत्थान या आइसोस्टेटिक रिबाउंड हुआ है।