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वन विभाग से एनओसी तो मिल गई, पर पीएम आवास में वनकर्मियों के लिए नहीं जगह

-३०० नए बेड के अस्पताल का पैंच फिर फंसा, एनएमसी के नोम्स के हिसाब से जिला अस्पताल होना है ६०० बिस्तर का

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दमोह

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Aakash Tiwari

Jan 19, 2025


दमोह. बरपटी में बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेज में मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं रहेगी। जिला अस्पताल में ही मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स तैनात रहेंगे। यह बात साफ होने के बाद अब एनएमसी के नियमों के तहत जिला अस्पताल में तीन सौ बेड बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने अस्पताल के बगल में खाली पड़ी वन विभाग की जमीन की एनओसी भी दिला दी है, लेकिन इस मामले में अब वनकर्मियों के आवास पेंच फंसा रहे हैं।
दरअसल कलेक्टर सुधीर कोचर ने कहा था कि यहां रह रहे एक दर्जन वनकर्मियों को पीएम आवास में शिफ्ट कर देंगे। इससे उक्त जमीन पर अस्पताल बनाया जा सकेगा, लेकिन मालूम चला है कि नपा सीएमओ ने पीएम आवास में मकान खाली न होने की बात कही है। बताया गया कि सभी मकान बुक हैं और कोई भी मकान खाली नहीं है। अब इस स्थिति में इन वनकर्मियों के परिवार को शिफ्ट करने की राह भी जटिल हो चुकी है। बताया जाता है कि यह बात हालही में हुई बैठक के दौरान सामने आई थी।
-विकल्प के तौर पर अस्पताल में है जगह
हालांकि अभी विकल्प के तौर अस्पताल में भी नया तीन सौ बेड का अस्पताल बनाया जा सकता है। सिविल सर्जन कार्यालय और ओपीडी कॉम्प्लेक्स को तोड़कर पार्किंग सुविधायुक्त बिल्डिंग बनाई जा सकती है। सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन इससे सहमत भी हैं। उन्होंने इसकी ड्राइंग पर काम शुरू करने के निर्देश भी संबंधित इंजीनियर को दिए थे।
-जगह की कमी के चलते वन विभाग की जमीन पर फोकस
बताया जाता है कि अस्पताल परिसर में पार्किंग के लिए जगह नहीं है। परिसर में अधिकांश हिस्से पर निर्माण हो चुका है। पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर यदि अस्पताल बनाया भी जाता है तो मरीजों की संख्या दो गुना होगी। ऐसे में परिसर में मरीजों के खड़े होने तक जगह नहीं रहेगी। वाहनों की संख्या भी बढ़ जाएगी। इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन बगल में पड़ी वन विभाग की जमीन को बेहतर विकल्प मानकर चल रहा है।

वर्शन

वन विभाग की जमीन तो मिल गई है, लेकिन यहां रह रहे वनकर्मी पीएम आवास में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे, क्योंकि वहां पर मकान खाली नहीं है। सीएमओ ने इस बारे में कलेक्टर को बताया है। जहां तक दूसरे विकल्प की बात है तो यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

डॉ. राकेश राय, सिविल सर्जन