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रेगिस्तान में फिर चढ़ा सूरज का पारा, 37.6 डिग्री पर पहुंचा

स्वर्णनगरी सहित जिले भर में दिन-ब-दिन गर्मी के तेवरों में तल्खी आने का दौर जारी है। रविवार को तेज धूप ने लोगों को परेशान कर दिया।
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बाड़मेर

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Yogendra Kumar Sen

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Updated: 12 Apr 2026, 9:11 PM IST

स्वर्णनगरी सहित जिले भर में दिन-ब-दिन गर्मी के तेवरों में तल्खी आने का दौर जारी है। रविवार को तेज धूप ने लोगों को परेशान कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार दिन का अधिकतम तापमान बढ़ कर 37.6 व न्यूनतम 21.0 डिग्री रहा। एक दिन पहले यह क्रमश: 36.5 व 23.5 डिग्री रहा था। पश्चिमी विक्षोभ के बाद शुष्क हुए मौसम के चलते धूप में तपिश बढ़ रही है। मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार आगामी दिनों में पारा और चढ़ेगा। इसके आगामी सप्ताह में 41 डिग्री तक पहुंचने के आसार हैं। शहर के इलेक्ट्रोनिक्स उत्पादों की दुकानों व शोरूमों में लोग कूलर व एयरकंडीशनर की खरीद के लिए पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में इन उत्पादों की बिक्री में और इजाफा होना तय माना जा रहा है। इसी वजह से इलेक्ट्रोनिक्स सामान के कारोबारी कूलर व एसी के साथ रेेेफि्रजरेटर, वाटर कूलर आदि का स्टॉक मंगवा रहे हैं।

पोकरण क्षेत्र में भीषण गर्मी के कारण आमजन बेहाल हो रहा है। रविवार सुबह सूर्य की तेज किरणें निकली। सुबह 9 बजे बाद तापमान बढऩे लगा। दोपहर में भीषण गर्मी का असर बढ़ गया। भीषण गर्मी के कारण दोपहर में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया। देर शाम तक भी गर्मी का दौर जारी रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ।


वल्लभाचार्य जयंती पर आज निकलेगी शोभा यात्रा

पुष्टिमार्ग के संस्थापक आचार्य वल्लभाचार्य की जयंती के अवसर पर सोमवार को जैसलमेर में शोभा यात्रा निकाली जाएगी। शोभा यात्रा सायं पांच बजे मंदिर पैलेस स्थित गिरधारीजी मंदिर से प्रारंभ होकर ढिब्बा पाडा स्थित मदनमोहन मंदिर तक जाएगी। जैसलमेर के पुष्टिमार्गीय वैष्णव समाज से आग्रह किया गया है कि बड़ी संख्या में शामिल होकर शोभा यात्रा को सफल बनाएं। वैष्णव कमलकिशोर आचार्य ने बताया कि वल्लभाचार्य जयंती हिन्दू वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। आचार्य वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ई. में वाराणसी में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने भारत के ब्रज क्षेत्र में पुष्टि संप्रदाय की स्थापना की थी और उन्हें भगवान कृष्ण का प्रबल अनुयायी तथा भक्ति आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। आचार्य ने यह भी बताया कि वल्लभाचार्य श्रीकृष्ण के प्रबल अनुयायी थे और श्रीनाथजी की पूजा करते थे, जिन्हें भगवान कृष्ण का एक रूप माना जाता है। एक लोकप्रिय धारणा के अनुसार इसी शुभ दिन पर भगवान कृष्ण वल्लभाचार्य के सामने प्रकट हुए थे। उन्होंने गोवर्धन पर्वत के पास भगवान कृष्ण की मूर्ति खोजी थी, जिसके बाद पुष्टि संप्रदाय की ओर से भगवान कृष्ण की 'बाला' या युवा छवि की भक्ति के साथ पूजा की जाती है।