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हद है: भर्ती मरीजों की थाली में परोसी जा रही पतली दाल, जली रोटियां व सस्ती सब्जी

-वार्डों से लगातार खाने को लेकर हो रही शिकायतें, प्रबंधन नहीं कर रहा जांच -25 रुपए थाली के हिसाब से हुआ टेंडर भी सवालों के घेरे में

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दमोह

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Aakash Tiwari

May 15, 2025

दमोह. जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए दोयम दर्जे का खाना परोसा जा रहा है। मरीज पतली दाल, सस्ती सब्जी और जली रोटियां दिए जाने की शिकायतें लगातार कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन के पास खाने की गुणवत्ता की जांच करने का समय नहीं है। पिछले महीने घटिया खाने के संबंध में दो शिकायतें प्रबंधन के पास पहुंची थी। यहां प्रबंधन का कहना है कि दोनों शिकायतों पर कार्रवाई की गई और संबंधित एजेंसी पर पैनाल्टी लगाई है। ताज्जुब की बात यह है कि शिकायतें मिलने के बावजूद प्रबंधन न तो रसोईघर की जांच कर रहा है। न ही बंटने वाले खाने को चखकर सप्लाई करा रहा है। जबकि पूर्व में खाने की जांच दो डॉक्टर्स करते थे। उसके बाद ही वार्डों में खाना सप्लाई होता था। बताया जाता है कि २५ रुपए प्रति मरीज के हिसाब से टेंडर दिया गया है, जो मंहगाई के दौर में समझ से परे है।
-गरीब मरीजोंं की मजबूरी का उठा रहे फायदा
जिला अस्पताल में ९० फीसदी भर्ती मरीजों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती। घर या बाहर से खाना नहीं मंगा सकते हैं। ऐसे में इन्हें यही खाना खाना मजबूरी है। खाना सप्लाई करने वाली फर्म इसका फायदा उठा रही है। मीनू के हिसाब से खाना न देकर रोज की तरह पतली दाल, पतली खिचड़ी और जली रोटियां दी जा रही हैं।
-घर से मंगवाकर खा रहे खाना….
पत्रिका ने प्रथम तल पर बने वार्ड का जायजा लिया, यहां पर एक मरीज जिसकी हालत गंभीर नजर आ रही थी। वह घर का बना खाना खा रहा था। जबकि कुछ देर पहले ही खाना वार्ड में सप्लाई हुआ था। उससे पूछा तो उसका कहना था कि घर का खाना ही मंगवाता है। वहीं, दूसरी तरफ एक मरीज के खाने की थाली बगल में रखी थी। खाना ठंडा था, इस वजह से मरीज ने नहीं खाया।
-खाने की थाली से सलाद गायब
पड़ताल में पाया कि मरीजों की थाली में चार रोटी, एक करछुल चांवल और एक करछुल दाल दी गई। नियमानुसार सलाद देने का प्रावधान है, लेकिन सलाद गायब थी। मरीजों को भी इसके बारे में जानकारी नहीं है। यही वजह है कि उनके द्वारा भी सलाद की मांग नहीं की जा रही है।
-जांच के बिना बिलों का हो रहा भुगतान
खाने की जांच के लिए अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह को जिम्मा सौंपा गया है। उनके द्वारा खाने की न तो जांच की जाती है। न हीं वे रसोइघर जाकर जांच कर रहे हैं। सूत्रों की माने तो अस्पताल में ६० से ७० फीसदी मरीजों को खाना सप्लाई हो रहा है, जबकि भुगतान १०० फीसदी बिलों का हो रहा है।
फैक्ट फाइल
-मीनू का नहीं हो रहा पालन।
-खाने के साथ नहीं दी जा रही सलाद।
-मंहगी सब्जी होने पर सस्ती सब्जी की बनती है।
-वार्ड के अंदर जाकर नहीं बांटते खाना।
-ठेले तक खाना लेने आ रहे मरीजों को ही दिया जा रहा खाना।
-बर्तन धोने का काम एजेंसी का है, लेकिन कई अटेंडर खुद धो रहे बर्तन।

वर्शन
खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। जुर्माना भी लगाया है। यह ठेका मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ है। मैं दिखवाता हूं।

डॉ. रविंद्र ठाकुर, सिविल सर्जन दमोह

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