
उज्जैन. जनजाति सुरक्षा मंच की एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक लोकमान्य तिलक विद्यालय में आयोजित की गई। बैठक में जनजाति समाज के अधिकारों, संरक्षण और वर्तमान चुनौतियों पर गंभीर चर्चा की गई। कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों और समाज प्रमुखों ने एकजुट होकर समाज के हितों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास करने का संकल्प लिया। साथ ही आगामी सांस्कृतिक समागम में बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
बैठक को संबोधित करते हुए क्षेत्र संगठन मंत्री सुभाष बडोले ने अनुच्छेद 341 और अनुच्छेद 342 के प्रावधानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जातियों के लिए धर्म परिवर्तन के बाद सूची से नाम हटाने का स्पष्ट प्रावधान है, जबकि अनुसूचित जनजातियों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है। इस कारण जनजातीय समाज धर्मांतरण का शिकार हो रहा है और कुछ मामलों में लोग दोहरे लाभ भी प्राप्त कर रहे हैं। बैठक में मांग की गई कि अनुच्छेद 342 में संशोधन कर धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर किया जाए।
बैठक में आगामी 24 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित सांस्कृतिक समागम ‘गर्जनामहारैली’ की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। आयोजकों ने बताया कि जिले के गांव, विकासखंड और जिला स्तर पर व्यापक रणनीति बनाई जा रही है, ताकि हजारों लोग इस आयोजन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद कर सकें। इस आंदोलन के प्रेरणास्रोत डॉ. कार्तिक उरांव के योगदान को भी याद किया गया। बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने एकजुट होकर इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और दिल्ली में ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराने का संकल्प लिया। बैठक में प्रांत सहसंगठन मंत्री मिथुन मकवाने, प्रांत संयोजक मेहताब सिंह बर्डे, जिला अध्यक्ष एवं प्रांत सहसंयोजक नगरीय-कार्य ईश्वर पटेल, सचिव संजय अग्रवाल, पूर्व जिला अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, विजयेन्द्र सिंह आरोण्या, महेश गोंड, डॉ. कुमावत, काशीराम रायकवार, देवेंद्र जोशी, पीसी रायकवार, कोमल खत्री, मेहताब सिंह परस्ते, गोविंद मुंदड़ा, लोकेन्द्र सिंह सोलंकी, राजकुमार शर्मा, जगदीश रायकवार,अजय जैन, जयप्रकाश दुबे, अजीतेश नरूला, प्रेम सेठिया एवं वासु वात्सल्य सहित गणमान्य जन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
Updated on:
10 Apr 2026 07:59 pm
Published on:
10 Apr 2026 07:52 pm
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