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MPPSC ने अमान्य कर दी इस यूनिवर्सिटी की डिग्री, अभ्यर्थियों की पात्रता खारिज

MPPSC- नाम के फेर में उलझा भविष्य एक का चयन, दो की उम्मीदवारी खारिज, अब मामला कोर्ट में, हिन्दी विषय से जुड़ी डिग्री अमान्य मानने का मामला तूल पकड़ रहा

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विवि के पाठ्यक्रम नामकरण और भर्ती एजेंसियों की पात्रता व्याख्या के बीच तालमेल की कमी

DAVV के पाठ्यक्रम नामकरण और भर्ती एजेंसियों की पात्रता व्याख्या के बीच तालमेल की कमी

MPPSC- सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा-2024 में मप्र लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) MPPSC द्वारा देवी अहिल्या विवि DAVV की हिन्दी विषय से जुड़ी डिग्री अमान्य मानने का मामला तूल पकड़ रहा है। आयोग ने दो अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी यह कहते हुए निरस्त कर दी कि उनकी पीजी उपाधि विज्ञापन में तय विषय अनुरूप नहीं है। दोनों अभ्यर्थी डीएवीवी की भाषा अध्ययनशाला से पासआउट हैं। एमए व्यवहारिक हिंदी अनुवाद एवं साहित्य की डिग्री है।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने नौ की उम्मीदवारी निरस्त की

आयोग ने 1930 पदों पर भर्ती निकाली थी। हिन्दी के 113 पद हैं। दस्तावेज सत्यापन के दौरान आयोग ने नौ की उम्मीदवारी निरस्त की थी। इनमें से दो ने आपत्ति दर्ज कराते हुए दस्तावेज, विवि का स्पष्टीकरण पेश किया था। कहना था कि उनकी डिग्री मूल रूप से हिन्दी विषय की ही है।

पत्र लिख स्पष्ट किया कि संबंधित डिग्री हिन्दी विषय के तहत ही संचालित होती है

विवि ने भी आयोग को पत्र लिख स्पष्ट किया कि संबंधित डिग्री हिन्दी विषय के तहत ही संचालित होती है। इसके बावजूद आयोग ने दोनों की पात्रता खारिज कर दी। प्रभावित अभ्यर्थियों ने अब हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। हालांकि आयोग के वकील ने समय मांगा है।

विवि के पाठ्यक्रम नामकरण और भर्ती एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी

मामला केवल दो उम्मीदवारों तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह विवि के पाठ्यक्रम नामकरण और भर्ती एजेंसियों की पात्रता व्याख्या के बीच तालमेल की कमी को भी उजागर कर रहा है।

एक का चयन होने पर मामले ने पकड़ा तूल

आयोग का कहना है, विज्ञापन में हिन्दी या भाषा विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर योग्यता तय की गई थी। संबंधित डिग्री का नाम तय विषय से अलग है। इसी आधार पर दोनों को शैक्षणिक रूप से अयोग्य मान उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई। मामले ने तूल तब पकड़ा, जब विवि के ही इसी पाठ्यक्रम के एक अन्य अभ्यर्थी का चयन हो गया। इसे लेकर विवि प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं।

लिखित जानकारी दी, फिर भी वजह स्पष्ट नहीं

डीएवीवी के हिन्दी अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह के अनुसार संबंधित डिग्री हिन्दी विषय की ही स्नातकोत्तर उपाधि है। आयोग को लिखित रूप से जानकारी दी थी कि सिर्फ पाठ्यक्रम का नाम अलग है। एक का चयन, दो की उम्मीदवारी निरस्त होने का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा।