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पाक को तुर्की से सैन्य सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतराः जॉन बोल्टन

चेतावनीः दुनिया को इसे गंभीरता से लेना चाहिए वाशिंगटन. पूर्व अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने पाकिस्तान को तुर्की से मिल रहे सैन्य सहयोग पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। एक साक्षात्कार में बोल्टन ने कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन की वैश्विक महत्वाकांक्षाएं पाकिस्तान […]

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जयपुर

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Nitin Kumar

May 24, 2025

चेतावनीः दुनिया को इसे गंभीरता से लेना चाहिए

वाशिंगटन. पूर्व अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने पाकिस्तान को तुर्की से मिल रहे सैन्य सहयोग पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। एक साक्षात्कार में बोल्टन ने कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन की वैश्विक महत्वाकांक्षाएं पाकिस्तान में विशेष रुचि के रूप में सामने आ रही हैं। उन्होंने चेताया कि दुनिया को तुर्की-पाक सैन्य सहयोग पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

बोल्टन ने भारत द्वारा 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया उचित कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत को उन ठिकानों पर कार्रवाई का अधिकार है, जहां से हमलों की साजिश रची गई। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान को चीन से मिल रही सैन्य मदद को भी भारत के लिए एक बड़ा खतरा बताया और आतंकवाद पर नकेल कसने की सलाह दी।

‘ट्रंप तो ट्रंप ही हैं’: बोल्टन का कटाक्ष

बोल्टन ने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की ‘श्रेय लेने की आदत’ पर तंज कसते हुए कहा, 'यह भारत के खिलाफ कुछ नहीं है, यह सिर्फ ट्रंप का ट्रंप होना है।' ट्रंप ने दावा किया था कि भारत-पाक संघर्ष में अमरीका की मध्यस्थता से युद्ध टला। इस पर बोल्टन ने कहा कि ट्रंप बिना तथ्य जाने श्रेय लेने कूद पड़ते हैं। ट्रंप ने पीएम मोदी, उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश मंत्री रुबियो से जरूर बात की होगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि युद्धविराम सिर्फ उनकी वजह से हुआ। ट्रंप का यह स्वभाव है कि वह हर वैश्विक घटना को अपने नाम से जोड़ लेते हैं – भले ही सच्चाई कुछ और हो।