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UP Jail Reforms: योगी सरकार का नया जेल मैनुअल, क्या बदलेंगे आज़म ख़ान जैसे बंदियों के हालात?

UP Jail Reforms: उत्तरा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेलों को दंड केंद्र के बजाय सुधार गृह बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। उम्रदराज व बीमार बंदियों की सूची तैयार होने से पुराने मामलों और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।
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भारत

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MI Zahir

Aug 29, 2026

UP Jail Reforms News.

योगी सरकार के जेल सुधारों के बीच आज़म ख़ान की रिहाई और राहत को लेकर सियासी चर्चाएं तेज़ हैं। ( फोटो: AI)

Prison Modernization की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारागार प्रणाली में बुनियादी बदलावों के निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार का मुख्य मक़सद जेलों को केवल दंडात्मक संस्थान न रखकर उन्हें वास्तविक सुधार व पुनर्वास केंद्र के रूप में तब्दील करना है। इसके लिए ब्रिटिश हुकूमत के दौर के पुराने कानूनों'जेल अधिनियम 1894' और 'कैदी अधिनियम 1900' समाप्त कर समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप नया सुधारात्मक कारागार अधिनियम लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई है।

बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार बंदियों की समीक्षा

प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार, 75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बंदियों, असाध्य रोगों से जूझ रहे कैदियों, छोटे बच्चों के साथ रह रहीं महिला बंदियों तथा ऐसे विचाराधीन कैदियों की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है जो केवल मुचलका या ज़मानत राशि न भर पाने के कारण निरुद्ध हैं। इस नीति का उद्देश्य मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कारागारों से अत्यधिक भीड़ के दबाव को कम करना है।

क्या आज़म ख़ान पर पड़ेगा इस नीति का असर?

सपा के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान (जिनकी उम्र 75 वर्ष के पार है और वे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित रहे हैं) के संदर्भ में यह सवाल लगातार चर्चा में है।

प्रशासनिक व चिकित्सीय लाभ: जेल सुधारों के तहत उम्रदराज और बीमार कैदियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा, जेल अस्पताल से उच्च चिकित्सा केंद्रों में त्वरित रेफरल और मानवीय आधार पर जेल के भीतर विशेष देखभाल की सहूलियत स्वतः लागू होगी।

रिहाई और ज़मानत की स्थिति: न्यायिक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बंदी की रिहाई या ज़मानत पूरी तरह से संबंधित अदालतों के आदेशों और मुकदमों की धाराओं पर निर्भर करती है। प्रशासनिक सुधार न्यायिक प्रक्रिया को ओवररूल नहीं कर सकते, किंतु जेल प्रशासन द्वारा प्रस्तुत स्वास्थ्य रिपोर्ट ज़मानत याचिकाओं में विधिक संदर्भ बन सकती है।

मुख्य सुधार क्षेत्र प्रशासनिक व्यवस्था लक्षित प्रभाव


ओपन जेल मॉडल कम जोखिम वाले और छोटे अपराधों के बंदी सामाजिक पुनर्वास और जेलों में भीड़ नियंत्रण
हाई-सिक्योरिटी बैरक पेशेवर अपराधी, माफिया और आतंकी तत्व जेल के भीतर से आपराधिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक
तकनीकी निगरानी 4,200+ सीसीटीवी कैमरे व ई-प्रिजन सिस्टम पारदर्शिता, भ्रष्टाचार निवारण और विज़िटर मॉनिटरिंग
मानवीय राहत सूची 75+ आयु, गंभीर बीमार व निर्धन बंदी विधिक सहायता और जेल अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण

कड़ी सुरक्षा और आधुनिक तकनीक का संतुलन

एक तरफ जहां सामान्य और छोटे अपराधियों के लिए 'ओपन जेल' की नीति प्रस्तावित है, वहीं पेशेवर अपराधियों, माफिया और संगीन मामलों के बंदियों के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा वाली हाई-सिक्योरिटी बैरक अनिवार्य की जा रही हैं। ई-प्रिजन पोर्टल, विज़िटर मैनेजमेंट सिस्टम और वीडियो वॉल के माध्यम से लखनऊ मुख्यालय से 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह सुधारात्मक मॉडल दंड और न्याय के संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करता है।