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Vat savitri vrat: इस दिन सुहागन महिलाएं इस विधि से करें पूजा, जानें महत्व और शुभ मुहूर्त

इस दिन सुहागन महिलाएं इस विधि से करें पूजा, जानें महत्व और शुभ मुहूर्त

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भोपाल

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Tanvi Sharma

May 31, 2019

vat savitri vrat 2019

Vat savitri vrat: इस दिन सुहागन महिलाएं इस विधि से करें पूजा, जानें महत्व और शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिन महिलाएं बहुत से व्रत रखती हैं। उन्हीं पवित्र व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत है। वट सावित्री व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन रखा जाता है। इस दिन सुहागिन और सौभाग्यवती महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करती हैं और परिक्रमा भी लगाती हैं। मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री व्रत पति की लंबी आयु और संतान के उज्जवल भविष्य के लिए रखा जाता है।

वट सावित्री पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या का समापन: 3 जून 2019, सोमवार शान 03:31 बजे।

वट सावित्री पूजा विधि

इस दिन महिलाएं सुबह उठकर नित्यकर्म से निवृत होने के बाद नए वस्त्र पहनकर, सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद पूजा की सारी सामग्री को एक थाली में सजा लें और वट यानी बरगद वृक्ष के नीचे सभी सामग्री रख दें और आसन बिछाकर बैठ जाएं। इसके बाद सबसे पहले सत्यवान और सावित्री की मूर्ति को वहां स्थापित करें और अन्य सामग्री जैसे धूप, दीप, रोली, भिगोए चने, सिंदूर आदि से पूजन करें और लाल कपड़ा व फल अर्पित करें। फिर बांस के पंखे से सावित्री-सत्यवान को हवा करें और बरगद के एक पत्ते को अपने बालों में लगाएं। इसके बाद धागे को पेड़ में लपेटते हुए जितना संभव हो सके 5,11, 21, 51 या 108 बार बरगद के पेड़ की परिक्रमा करें। अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सूनें। इसके बाद घर आकर उसी पंखें से अपने पति को हवा करें और उनका आशीर्वाद लें।

पूजा का महत्व

सुहागन स्त्रियों के लिए वर पूजा का बहुत खास महत्व होता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन और संतान के कल्याण के लिए वट वृक्ष का पूजन करती हैं। माना जाता है, ज्येष्ठ माह की अमावस्या के दिन सावित्री नामक स्त्री में अपने सुहाग सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। तभी से इस व्रत को पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने लगा। इस व्रत में वट वृक्ष का महत्व बहुत खास होता है।