
छिंदवाड़ा.छिंदवाड़ा कन्हान कॉम्प्लेक्स परियोजना के अंतर्गत जुन्नारदेव के ग्राम हिरदागढ़ में प्रस्तावित संगम डैम-1 के निर्माण में माचागोरा डैम की तरह भू-अर्जन की चुनौतियां खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय ग्रामीण डैम के पक्ष में हैं लेकिन बाहरी तत्व उकसावे की राजनीति से 50 गांवों को मिलनेवाले पानी में बाधक बन रहे हैं। जल संसाधन विभाग के अधिकारी-कर्मचािरयों को सर्वेक्षण से रोक रहे हैं। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों ने पुलिस-प्रशासन से मदद मांगी है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक जुन्नारदेव के अधिकांश गांव सूखा प्रभावित है, जहां भू-जल स्तर पर भी काफी नीचे होने के कारण पेयजल समस्या बन रही है। खेती का रकबा भी कम हो रहा है। इसे देखते हुए कन्हान नदी पर बांध बनाकर गांवों को पानी देने का प्रोजेक्ट संगम-1 के नाम से बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट में 438.7 हैक्टेयर जमीन डूब में आ रही है। इनमें निजी जमीन 283.3 हैक्टेयर, सरकारी 87.2 हैक्टेयर और वन विभाग की जमीन 68.2 हैक्टेयर आ रही है। इस समय विभागीय कर्मचारी इस इलाके में पहुंचकर डैम का सर्वेक्षण कार्य कर रहे हैं। उनमें बाहरी तत्व आकर बाधा पहुंचा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। इससे बांध के जल्द निर्माण में देरी हो रही है।
केन-बेतवा की तर्ज पर मिलेगा स्पेशल पैकेज
विभागीय अधिकारियों की मानें तो वे क न्हान कॉम्प्लेक्स के भू-अर्जन में केन्द्र सरकार के निर्धारित कानून से मुआवजा तो दिलाएंगे ही। उनकी बातचीत केन-बेतवा प्रोजेक्ट के स्पेशल मुआवजा पैकेज पर चल रही है। इससे स्थानीय किसानों को लाभ होगा। इस मुद्दे पर प्रदेश शासन से सकारात्मक पहल होने की उम्मीद है।
30 एमसीएम पानी से होगी भरपूर खेती
इस संगम-1 बांध के निर्माण से 30 एमसीएम पानी का स्टोरेज होगा। जिसमें कुछ हिस्सा जल निगम के माध्यम से ग्रामीणजनों को पेयजल के लिए मिलेगा वहीं 8335 हैक्टेयर जमीन भी सिंचिंत होगी। इसके अलावा पूरे इलाके में भू-जल स्तर भी बढ़ जाएगा।
भू-अर्जन में उकसावे से माचागोरा बांध 30 साल लेट
यहां बता दें कि पेंच नदी पर माचागोरा बांध 30 साल पहले प्रस्तावित हुआ था। किसानों के भू-अर्जन की बाधाओं के चलते इसका निर्माण काफी लेट हुआ। उस समय भी बाहरी तत्वों ने बांध निर्माण में बाधा डाली थी। तब 2014-15 में शिवराज सरकार की दृढ़ता पर तत्कालीन कलेक्टर महेश चंद्र चौधरी ने बांध निर्माण स्थल पर पुलिस की छावनी बनवाई थी। तब बांध निर्माण पूर्ण हो पाया था। इस बांध के बन जाने से न केवल छिंदवाड़ा शहर बल्कि करीब एक लाख हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फसल सिंचित हो रही है। ये ही चुनौतियां अब सामने आ रही है।
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इनका कहना है…
संगम बांध-1 के निर्माण में भू-अर्जन के लिए विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों के सर्वेक्षण को रोकने के प्रयास बाहरी तत्व कर रहे हैं। इसके लिए पुलिस-प्रशासन से लगातार मदद मांगी जा रही है। इस बांध के निर्माण से जुन्नारदेव के 50 गांवों का सूखा समाप्त हो जाएगा। किसानों के लिए हम शासन से स्पेशल पैकेज पर बातचीत करने प्रयासरत है।
-कुमकुम पटेल, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग।
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Published on:
01 Jun 2024 04:53 pm
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