इंदौर. शिलांग में वारदात के शिकार ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा (30) पिता अशोक रघुवंशी का शव उनका बड़ा भाई विपिन रघुवंशी फ्लाइट से बुधवार शाम इंदौर लेकर पहुंचा। मोक्ष वाहन से ताबूत में बंद शव सहकार नगर, कैट रोड िस्थत घर ले गए। वाहन के कॉलोनी में आते ही सन्नाटा पसर गया। ताबूत को देख हर किसी का कलेजा फट गया। मां उमा रघुवंशी अपने कलेजे के टुकड़े को इस हाल में देख बदहवास हो गई। उसकी एक झलक (चेहरा) देखने के लिए छटपटाने लगी।
राजा को घर तक लाने वाले ये बात जानते थे कि शव डिकंपोज हो चुका है, ताबूत को खोला नहीं जा सकता। घर के जिस आंगन में कभी राजा अपने परिजन के साथ बैठकर ठहाके लगाया करते थे, वहां कुछ मिनट ताबूत को रखा। माता-पिता, परिवार की महिलाओं का रूदन कोई संभाल नहीं पाया। परिवार के कुछ सदस्यों ने हिम्मत कर ताबूत उठाया और बाहर सजी अर्थी पर रख दिया। मां का मन फिर भी नहीं माना। वह दौड़ते हुए बेटे के पास जा पहुंची और उसे दुलारने का प्रयास करने लगी। यह दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गई। ससुराल पक्ष दामाद की हत्या और लापता बेटी के दुख में आपा खो बैठा। परिवार के लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे। बेटे की एक झलक पाने मां चीखती रही। बार-बार याद कर कहती रही कि बेटा भूखा चला गया…उसने कुछ नहीं खाया था, मैंने तुझे जाने से क्यों नहीं रोका। लापता बहू सोनम के सकुशल मिलने की कामना करते रहे। शाम को परिजन ने रीजनल पार्क मुक्तिधाम में राजा का दाह संस्कार किया।