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चैटबॉट की मदद से सादा भोजन को भी पौष्टिक बना रहीं ग्रामीण महिलाएं

एक साधारण गृहिणी और बच्चे की मां दीपिका ने चैटबॉट (9653309578) की मदद से न केवल अपने बच्चे का खानपान सुधारा, बल्कि घर के सादे खाने को भी पौष्टिक बनाना सीख लिया।

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चैटबॉट

तकनीक अब सिर्फ दफ्तरों या कंपनियों तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि आम लोगों की जिंदगी भी बदल रही है। जिले के नौगांव-2 परियोजना अंतर्गत ग्राम पुतरी की रहने वाली दीपिका इसका उदाहरण हैं। एक साधारण गृहिणी और बच्चे की मां दीपिका ने चैटबॉट (9653309578) की मदद से न केवल अपने बच्चे का खानपान सुधारा, बल्कि घर के सादे खाने को भी पौष्टिक बनाना सीख लिया।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने दिखाई राह

दीपिका बताती हैं कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने गृहभेंट के दौरान यह नंबर दिया और बताया कि एफएमसीएच संगठन ने इसे गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों की माताओं के लिए शुरू किया है। इस चैटबॉट पर संदेश भेजने से महिलाओं को स्वास्थ्य व पोषण संबंधी सलाह आसानी से मिल जाती है।

खानपान की आदतों में बदलाव

पहले दीपिका अपने बच्चे को दिन में केवल दो बार घर का खाना और बाकी समय बाजार के तले-भुने पैकेट वाले खाद्य पदार्थ देती थीं। लेकिन चैटबॉट से सलाह मिलने के बाद उन्होंने बच्चों को बाहर का खाना देना बंद कर दिया और अब दिन में 4-5 बार घर का बना पौष्टिक भोजन देने लगीं।

सादे भोजन को पौष्टिक बनाना सीखा

दीपिका की तरह ही अमृता ने चैटबॉट से सीखा कि साधारण भोजन को भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। अब वे सब्जियों को मिलाकर खिचड़ी जैसी पौष्टिक डिश बनाती हैं, साथ ही मुनगा की पत्तियों का चूर्ण भोजन में मिलाकर पोषण स्तर बढ़ाती हैं। इससे बच्चे की खाने की आदत सुधरी और उसकी सेहत भी बेहतर हुई। दीपिका कहती है अब मेरा बच्चा मजे से खेलते-खेलते खाना खा लेता है और मैं निश्चिंत रहती हूँ कि उसे सही पोषण मिल रहा है।