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चलती ट्रेन से गिरने के बाद महिला के बच्चों को सुरक्षित किया़

गुजरात पुलिस की जीपी-स्मैश पहल से चलती ट्रेन से गिरने के बाद महिला के बच्चों को सुरक्षित किया़ गया। वहीं दूसरी टीम महिला की तलाश में जुट गई।

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चलती ट्रेन

राज्य में नागरिकों की सुरक्षा और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली गुजरात पुलिस की गुजरात पुलिस - सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, अवेयरनेस एंड सिस्टमेटिक हैंडलिंग (जीपी-स्मैश) पहल ने एक बार फिर अपनी त्वरित कार्रवाई से मानवता और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया है।

यह घटना गुरुवार दोपहर करीब 3.15 बजे की है, जब तरुणा जैन नाम की एक जागरूक महिला यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुजरात पुलिस को टैग करते हुए एक गंभीर सूचना दी कि ट्रेन संख्या 12471 के एस-4 कोच में एक महिला अपने दो बच्चों के साथ यात्रा कर रही थी। ट्रेन जब कुडसड़ और कोसांबा (सूरत) के बीच पहुंची, तभी महिला चलती ट्रेन से नीचे गिर गई। उन्होंने तत्काल मदद की गुहार लगाई।

महज 4 मिनट में यानी 3.19 बजे, जीपी-स्मैश की स्टेट लेवल टीम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की। शिफ्ट इंचार्ज पुलिस उप निरीक्षकके.ओ. देसाई और कांस्टेबल अशोक ठाकोर ने गुजरात पुलिस के एक्स हैंडल से जीआरपी वडोदरा को टैग कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

तत्परता दिखाते हुए पश्चिम रेलवे वडोदरा ने तुरंत दो टीमें गठित कीं। पहली टीम ने संबंधित कोच से दोनों बच्चों को सुरक्षित कब्जे में लिया और उनकी देखरेख शुरू की। वहीं दूसरी टीम ने गिरी हुई महिला की तलाश प्रारंभ कर दी। दोपहर 3.41 बजे जीआरपी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए पुष्टि की कि दोनों बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनकी समुचित देखभाल की जा रही है। साथ ही, महिला की तलाश के लिए रेल पटरियों के आस-पास, अस्पतालों और अन्य संभावित स्थानों पर तलाशी अभियान जारी है।

जीपी-स्मैश पहल के अंतर्गत राज्य में नागरिकों को चौबीसों घंटे डिजिटल रूप से पुलिस से जुड़ने का माध्यम मिला है। यह पहल मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी तथा पुलिस महानिदेशक विकास सहाय के निर्देशन में 1 मार्च 2025 से आरंभ की गई थी।

पुलिस उप महानिरीक्षक लॉ एंड ऑर्डर दीपक मेघाणी के मार्गदर्शन में यह टीम राज्यभर में सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों, सुझावों और समस्याओं का रियल-टाइम में समाधान करती है। जिले, रेंज और यूनिट स्तर पर भी अलग-अलग टीमें इस प्रणाली को सहयोग करती हैं।

सिर्फ तकनीक नहीं, भरोसे की मिसाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि गुजरात पुलिस नागरिकों की सुरक्षा के लिए सिर्फ एक क्लिक दूर है।