
Monsoon 2019: एनसीआर में जोरदार बारिश, मानसून को लेकर की गई यह भविष्यवाणी
नोएडा। जहां बुधवार को मौसम ने करवट बदली और नोएडा व गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी के कई जिलाें में जोरदार बारिश हुई, वहीं स्काइमेट वेदर ने भी मानसून के बारे में भविष्यवाणी कर दी। एजेंसी के अनुसार, इस साल 93 फीसदी वर्षा के साथ कम बारिश होगी। मानसून अपने निर्धारित समय से थोड़ा लेट हो सकता है।
एजेंसी के वाइस प्रेसिडेंट ने की प्रेसवार्ता
स्काइमेट वेदर ने नोएडा में प्रेसवार्ता के दौरान दावा किया कि भारत में 4 जून को मानसून दस्तक देगा। इस साल देश के कुछ क्षेत्रों में मानसून कमजोर रहेगा। पूर्वी, पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य भारत में कम बारिश होगी, जबकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में मानसून सामान्य रहेगा। एजेंसी के वाइस प्रेसिडेंट व मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने कहा कि भारत में आगमन के समय मानसून कमजोर रहेगा।
अंडमान व निकोबार में 20 मई को आएगा मानसून
यहां सबसे पहले मानसून अंडमान व निकोबार में आता है। वहां आमतौर पर 20 मई को मानसून दस्तक देता है लेकिन इस बार इस क्षेत्र में 22 मई को मानसून आने की संभावना है। इसमें यह दो दिन पहले या बाद में भी हो सकता है। केरल में मानसून 4 जून को दस्तक दे सकता है। इसमें भी दो दिन का आंशिक बदलाव संभव है। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को आता है। इसी दौरान पूर्वात्तर में भारत के अन्य हिस्सों में मानसून आएगा। इसके आगमन से पहले केरल में प्री-मानसून वर्षा होती रहेगी।
सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना कम
नोएडा -एनसीआर में 29 जून को मानसून पहुंचने की संभावना है। जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में इसके सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना कम है। जून में मानसून की कमजोर शुरुआत रह सकती है। मानसून के दूसरे पार्ट में बारिश अच्छी हो सकती है। सितंबर के मुकाबले अगस्त में अच्छी बारिश हो सकती हैं।
सूखा पड़ने की आशंका 15 फीसदी
स्काइमेट वेदर के पूर्वानुमान के अनुसार, इस वर्ष मानसून की पहली वर्षा में सूखा पड़ने की आशंका 15 फीसदी है जबकि सामान्य से कम बारिश होने की आशंका 55 फीसदी है। सामान्य मानसून रहने की संभावना 30 फीसदी है। अल-नीनो की वजह से मानसून औसत से कम रहेगा। मध्य व दक्षिण भारत के हिस्से में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ेगी। मध्य प्रदेश, विदर्भ व दक्षिणी राज्यों के कुछ हिस्सों में तापमान अभी से 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक है, जो यहां के सामान्य तापमान से चार से पांच डिग्री तक ज्यादा है।
अल-नीनो होगा जिम्मेदार
स्काइमेट के अनुसार, सामान्य से कम बारिश होने के पीछे अल-नीनो जिम्मेदार होगा। स्काइमेट के अध्यक्ष जेपी शर्मा ने बताया कि अल-नीनो का मानसून पर प्रभाव पड़ता है। इसके चलते प्रशांत महासागर औसत से अधिक गर्म हो गया है। मार्च व मई के दौरान अल-नीनो की 80 फीसदी संभावना है, जो जून से अगस्त तक 60 फीसद तक कम होती है।
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Updated on:
15 May 2019 10:12 am
Published on:
15 May 2019 09:39 am

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