कहा जाता है कि कृष्ण ने पांडवों के लिए दुर्योधन से जिन पांच गांवों की मांग की थी वे बागपत, पानीपत, सोनीपत, तिलपत और वरुपत (आज का बरनावा) थे, लेकिन दुर्योधन ने इन्हें देने से इंकार कर दिया था और युद्ध के बिना सुई के नोक बराबर जमीन भी देने से मना कर दिया था। इससे अपमानित कृष्ण ने दुर्योधन के महल में रहने और खाने से इंकार कर दिया था। उन्होंने महात्मा विदुर के घर जाकर बथुआ का साग खाना ज्यादा उचित समझा था। महात्मा विदुर की वह कुटी आज भी गंगा के दूसरे पार बिजनौर जिले में पड़ती है। इस क्षेत्र में आज भी बथुआ बहुत अधिक पैदा होता है और यहां के लोग इसे बड़े ही चाव से खाते हैं।