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यूपी के इस जिले में है महाभारतकाल का ‘लाक्षागृह’

इतिहास की जानकारी करने और घूमने के लिहाज से शानदार जगह है बरनावा

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Rajkumar Pal

Jul 04, 2017

lakshagrih

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नोएडा.
महाभारत के युद्ध में लाक्षागृह की घटना का विशेष स्थान है। माना जाता है कि अगर दुर्योधन ने पांडवों को लाक्षागृह में जलाकर मार देने की साजिश न रची होती तो शायद महाभारत युद्ध की नींव नहीं पड़ती। इतिहास प्रसिद्ध लाक्षागृह के अवशेष आज भी मौजूद हैं जो उस भयानक साजिश की गवाही देते हैं। यही नहीं आज भी उस गुफा को देखा जा सकता है, जिससे भागकर पांडव जिंदा बच गए थे।




यह लाक्षागृह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से महज 35 किलोमीटर दूर, सरधना से 17 किलोमीटर दूर बागपत जिले के बरनावा में पड़ता है। इसी बरनावा में लाक्षागृह के निशान आज भी देखे जा सकते हैं। आज गांव के दक्षिण में लगभग सौ फ़ीट ऊंचे और लगभग तीस एकड़ जमीन पर फैले कई टीले हैं जो लाक्षागृह के अवशेष बताए जाते हैं। जिस गुफा से भागकर पांडवों ने अपनी जान बचाई थी, वह भी इस जगह से निकलकर पश्चिमी यूपी के हिंडन नदी के किनारे निकलती है।




कहा जाता है कि कृष्ण ने पांडवों के लिए दुर्योधन से जिन पांच गांवों की मांग की थी वे बागपत, पानीपत, सोनीपत, तिलपत और वरुपत (आज का बरनावा) थे, लेकिन दुर्योधन ने इन्हें देने से इंकार कर दिया था और युद्ध के बिना सुई के नोक बराबर जमीन भी देने से मना कर दिया था। इससे अपमानित कृष्ण ने दुर्योधन के महल में रहने और खाने से इंकार कर दिया था। उन्होंने महात्मा विदुर के घर जाकर बथुआ का साग खाना ज्यादा उचित समझा था। महात्मा विदुर की वह कुटी आज भी गंगा के दूसरे पार बिजनौर जिले में पड़ती है। इस क्षेत्र में आज भी बथुआ बहुत अधिक पैदा होता है और यहां के लोग इसे बड़े ही चाव से खाते हैं।

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